कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित पौंग झील में हो रही प्रवासी पक्षियों की लगातार मौतों के बाद जिले में बर्ड फ्लू को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। जिला प्रशासन की तरफ से फतेहपुर, देहरा, जवाली व इंदौरा उपमंडल में चिकन, अंडा और मछली बेचने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है। वहीं, चिकन व अंडा बेचने के साथ ही इन क्षेत्रों से चिकन आदि बाहर भी नहीं जा सकता है।
इंसानों के लिए भी खतरनाक है बर्ड फ्लू
आपको बता दें कि बर्ड फ्लू एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस की वजह से होता है। बर्ड फ्लू एक वायरल इंफेक्शन की तरह है जो ना केवल पक्षियों बल्कि दूसरे अन्य जानवरों और इंसानों के लिए भी खतरनाक है। बर्ड फ्लू से संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले जानवर और इंसान इससे बड़ी आसानी से संक्रमित हो जाते हैं। ये वायरस इतना अधिक खतरनाक होता है कि इससे मौत भी हो सकती है।
क्या हैं बर्ड फ्लू के लक्षण
बर्ड फ्लू होने पर आपको कफ, डायरिया, बुखार, सांस से जुड़ी दिक्कत, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, नाक बहना और बेचैनी जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, अगर आपको लगता है कि आप बर्ड फ्लू की चपेट में आ गए हैं तो किसी अन्य व्यक्ति के संपर्क में आने से पहले डॉक्टर को दिखाएं। ये बीमारी संक्रमित पक्षी के मल, नाक के स्राव, मुंह के लार या आंखों से निकलने वाली पानी के संपर्क में आने से होता है। संक्रमित मुर्गियों के 165ºF पर पकाए गए मांस या अंडे के सेवन से बर्ड फ्लू नहीं फैलता है लेकिन संक्रमित मुर्गी के अंडों को कच्चा या उबालकर नहीं खाना चाहिए।
किन लोगों को होता है बर्ड फ्लू का खतरा
H5N1 में लंबे समय तक जीवित रहने की क्षमता होती है। संक्रमित पक्षियों के मल और लार में ये वायरस 10 दिनों तक जिंदा रहता है। दूषित सतहों को छूने से ये संक्रमण फैल सकता है। अगर इसके फैलने का सबसे ज्यादा खतरा मुर्गीपालन से जुड़े लोगों को होता है। इसके अलावा संक्रमित जगहों पर जाने वाले, संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने वाले, कच्चा या अधपका मुर्गा-अंडा खाने वाले या संक्रमित मरीजों का देखभाल करने वाले लोगों को भी बर्ड फ्लू हो सकता है।
क्या है इसका इलाज और कैसे करें बचाव
अलग-अलग तरह के बर्ड फ्लू का अलग-अलग तरीकों से इलाज किया जाता है लेकिन ज्यादतर मामलों में एंटीवायरल दवाओं से इसका इलाज किया जाता है। लक्षण दिखने के 48 घंटों के भीतर इसकी दवाएं लेनी जरूरी होती हैं। बर्ड फ्लू से संक्रमित व्यक्ति के अलावा उसके संपर्क में आए घर के अन्य सदस्यों को भी ये दवाएं ली जाने की सलाह दी जाती है, भले ही उन लोगों में बीमारी के लक्षण ना हों। वहीं, इन्फ्लूएंजा से बचने के लिए डॉक्टर आपको फ्लू की वैक्सीन लगवाने की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा आप खुले बाजर में जाने, संक्रमित पक्षियों के संपर्क में आने और अधपका चिकन खाने से बचें। हाइजीन बनाए रखें और समय-समय पर अपने हाथ धोते रहें।




0 टिप्पणियाँ
Please do not enter any spam link in the comment box. Thanks