मैं 3 हजार फीट ऊपर हिमाचल की बीर बिलिंग साइट पर पैराग्लाइडिंग कर रहा था। अचानक पैराशूट हवा के विपरीत बहाव से सिकुड़ गया। कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था। रिजर्व पैराशूट खोला तो वह खाई के मुहाने पर लगे एक पेड़ में फंस गया और मैं वहीं लटक गया। अगर गिरता तो नीचे गहरी खाई थी, क्या होता पता नहीं। पेड़ पर ही लटके हुए देखा की ऊंचाई होने के बाद भी सिग्नल बेहतर थे। फोटो खींचे और सहायता के लिए मैसेज किए। अचिंत्य अपने साथी प्रवीण के साथ रस्सी और जरूरी उपकरण लाए।
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पांच घंटे बाद मैं उस डर से बाहर निकल पाया। अचिंत्य राणे अब तक मेरे दोस्त थे आज मेरा जीवन बचाकर सच्चे साथी बन गए। आपबीती सुनाते हुए वरिष्ट पैराग्लाइडिंग पायलट नरेंद्र यादव ने यह कहानी सोमवार को फोन पर सुनाई। उन्होंने कहा कि पर्वतारोहण की बेहतर ट्रेनिंग करके अचिंत्य कम सेय में रेस्क्यू करने के तरीके भी निपुणता से सीख गए हैं। अचिंत्य ने बहादुरी हमेशा याद रहेगी।
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बता दें कि अचिंत्य राणे लॉ की पढ़ाई कर रहे हैं। एवरेस्ट समिट करना इनका लक्ष्य है। इसके लिए वे लगातार ट्रेकिंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं। दो साल से हिमाचल प्रदेश की बीर बिलिंग साइट पर पैराग्लाइडिंग सीख रहे हैं। जिसके बाद मध्य प्रदेश स्थित पचमढ़ी से होशंगाबाद तक पैराग्लाइडिंग करेंगे।
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