
शिमला डेस्क: चंडीगढ़ वन विभाग में हिमाचल के व्यक्ति की नियुक्ति बतौर रेंज ऑफिसर की गई है। हिमाचल से ताल्लुक व्यक्ति का चंडीगढ़ में रेज अधिकारी बनना चंडीगढ़ वालों को रास नहीं आ रहा है और यह मामला अब राजनीतिक रंग ले लिया है।
विपक्ष ने पंजाब सरकार पर आरोप लगाया है कि कैप्टन सरकार की पकड़ चंडीगढ़ से ढ़ीली हो गई है। कमजोर होती दावेदारी का ही नतीजा है कि किसी हिमाचली को चंडीगढ़ का रेज अधिकारी बनाया गया है।
हालांकि, वन मंत्री साधु सिंह धर्मसोत ने मामले पर कैप्टन सरकार का बचाव करते हुए कहा कि चंडीगढ़ पर सरकार की दावेदारी कमजोर नहीं हुई है। जल्द ही चंडीगढ़ प्रशासन के समक्ष मामले को उठाया जाएगा। दूसरी तरफ, चंडीगढ़ प्रशासन ने बाकायदा रेंज ऑफिसर को ज्वाइंन करवाने के लिए एपाइंटमेंट लैटर भी भेज दिया है।
चंडीगढ़ पर रहा है पंजाब का प्रभुत्व:
बता दें कि नियुक्ति ऐसे समय में होने जा रही है, जब पंजाब सरकार कई बार चंडीगढ़ प्रशासन में अधिकारियों की नियुक्ति में अनदेखी का सवाल उठा चुकी है। स्पष्ट कर दें कि चंडीगढ़ पर हमेशा से पंजाब सरकार की प्रभुत्व अधिक रही है। हरियाणा की सरकार भी वर्षों से चंडीगढ़ पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए प्रयासरत है।
ऐसे में अब जब हिमाचल के रहने वाले व्यक्ति को चंडीगढ़ के महत्वपूर्ण पद पर बैठ जाना, न पंजाब सरकार को पच रहा है और ना ही हरियाणा सरकार को। चंडीगढ़ में नियुक्तियों को लेकर पंजाब-हरियाणा का 60:40 अनुपात है।
कैडर विलय के प्रस्ताव पर भी हुआ था विवाद:
वर्ष 2018 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने चंडीगढ़ के डिप्टी सुपरिंटैंडेंट ऑफ पुलिस (डी.एस.पी।) के पदों को दिल्ली, अंडमान एंड निकोबार, लक्षद्वीप, दमन और दीव और दादरा-नगर हेवली पुलिस सर्विस के कैडर में विलय करने का प्रस्ताव रखा था।
कैडर विलय के इस प्रस्ताव पर विवाद इतना तेज हो गया था कि केंद्र सरकार को नोटिफिकेशन ठंडे बस्ते में डालनी पड़ी थी। इसी कड़ी में चंडीगढ़ में अध्यापकों की भर्ती दौरान पंजाब के नियमों को ताक पर रखने का आरोप चंडीगढ़ प्रशासन पर लगा था। अकाली दल का आरोप था कि चंडीगढ़ प्रशासन पंजाब के अधिकारक्षेत्र में दखलअंदाजी कर रहा है।
‘हिमाचल का संयोग या अनुराग ठाकुर का दवाब’
चंडीगढ़ में हिमाचल के अधिकारी की एंट्री से साफ़ है कि चंडीगढ़ पर हिमाचल प्रदेश की भी हिस्सेदारी बढ़ेगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह भी है कि अनुराग ठाकुर की वजह से हिमाचल की एंट्री चंडीगढ़ में हुई है। हमीरपुर से सांसद अनुराग ठाकुर ने संसद में सवाल उठा कर चंडीगढ़ में हिमाचल के अधिकारियों के नियुक्ति की मांग की थी।
हमीरपुर सांसद के जवाब में गृह मंत्रालय रीआर्गेनाइजैशन एक्ट, 1966 का हवाला देते हुए बताया था कि चंडीगढ़ में डैपुटैशन पर हिमाचल प्रदेश के ऑफिसर तैनात होते थे लेकिन 1993 में चंडीगढ़ प्रशासन ने इस परंपरा को खत्म कर दिया। हिमाचल सरकार ने भी चंडीगढ़ प्रशासन को पत्र लिख प्रशासनिक स्तर पर होने वाली नियुक्तियों में हिमाचल की 7.19% हिस्सेदारी की बात रखी थी।



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