शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार और प्रदेश के बिजली बोर्ड पर लगातार बढ रही देनदारियों के बारे में कौन नहीं जानता। एक तरफ जहां हिमाचल सरकार वर्तमान में 50 हजार करोड़ से अधिक राशि के कर्ज में डूबी हुई है। वहीं, बिजली बोर्ड के आय के साधन कम और व्यय अधिक होने से घाटा बढ़ता जा रहा है।
पिछले साल प्रकशित एक रिपोर्ट के अनुसार बिजली बोर्ड पर कर्ज का बोझ 5 हजार करोड़ को पार कर चुका था। जो कि इस साल तक और बढ़ गया होगा। इस सब के बीच खबर सामने आई है कि औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में विद्युत सब स्टेशन न बनाने पर बिजली बोर्ड भारी खामियाजा भुगतना पड़ा है।
बतौर रिपोर्ट्स, पावर ग्रिड कारपोरेशन और बिजली बोर्ड के बीच हुए एक करार के तहत प्रति माह बिजली बोर्ड को प्रोजेक्ट बनाने में हो रही लेटलतीफी की एवज में करीब पांच करोड़ रूपए जुर्माना के तौर पर चुकाना पड़ रहा है। वहीं, लगभग 30 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट में लेटलतीफी करने के कारण बोर्ड पिछले आठ वर्षों से अब तक यह जुर्माना भर रहा है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो अब तक करीब 240 करोड़ रूपए का जुर्माना पावर ग्रिड कॉपरेशन को दिया जा चुका है। अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों इतने कर्ज में डूबे होने के बावजूद बोर्ड लगातार लेटलतीफी कर रहा है और जनता द्वारा चुकाए जा रहे कर का एक तरह से दुरुपयोग किया जा रहा है।




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