पौंग झील इलाके में घूम रहे मवेशियों को पकड़ने की जिम्मेदारी पुलिस को दी गई है। लेकिन जिस लापरवाही की वजह से रेड ज़ोन में मवेशी प्रवेश कर गए हैं, उस कारण बर्ड फ्लू हिमाचल प्रदेश में कोरोना के तरह ही भयावह रूप लेने की संभावना प्रबल हो गई है। इससे बर्ड फ्लू का वायरस पशुओं के जरिये इंसानों में भी फैल सकता है।
ऐसे में बड़ा सवाल है कि यदि पक्षियों से H1N5 वायरस मवेशियों में प्रवेश करता है फिर बिगड़ती स्थिति को काबू में करना प्रदेश सरकार के लिए मुश्किल हो जाएगी। पुलिस कर्मियों को मवेशी पकड़ने की जिम्मेदारी सौंप तो दे दी गई है लेकिन नाम न उजागर करने के शर्त पर पुलिस कर्मी ने बताया कि वह उस प्रतिबंध और प्रदूषित क्षेत्र में बिना किसी सुरक्षा उपकरण के जाने से भयभीत हो रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भी बर्ड फ्लू का यह वायरस उन्हीं इंसान में पाया गया है जो पीड़ित पक्षी के सीधे संपर्क में आए हैं। ज्यादातर वैसे लोग जो मुर्गी पालन और पक्षियों के देखभाल का काम करते हैं। बता दें कि अभी तक 3055 मृतक प्रवासी पक्षियों का आंकड़ा है। पोल्ट्री फार्म में अभी तक वायरस नहीं मिला है। स्थानीय पक्षियों के जालंधर भेजे सैंपल की रिपोर्ट दिन के भीतर आएगी। अभी तक करीब दर्जन स्थानीय कौओं की मौत हुई है, लेकिन इनमें बर्ड फ्लू की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
वहीं, कुछ हेल्थ रिपोर्ट्स के अनुसार यदि बर्ड फ्लू से पीड़ित पक्षी के मांस को 106℃ के ताप पर अच्छे से पकाया जाता है तो H1N5 वायरस नष्ट हो जाता है। हेल्थ रिपोर्ट ने इसकी प्रमाणिकता का दावा भी किया है।





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