पालमपुर। एक तरफ सरकार 3 साल के पूरा होने का जश्न मना रही है, तो दूसरी तरफ करुणामूलक आश्रित परिवार दर दर ठोकरें खाने को मजबूर हैं। करुणामूलक संघ के उपाध्यक्ष अजय कुमार ने सरकार को आड़े हाथ लेते हुए यह बात कही कि करूणामूलक नौकरियों के मुद्दे को सरकार ने 3 सालों में दरकिनार् ही किया है।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने करूणामूलकों के लिए सालाना 2।50 लाख आय सीमा की पॉलिसी तो बना दी है पर नौकरियां देने के मामले में असमर्थ रही है। उनका कहना है कि सरकार ने अपनी पॉलिसी मे नौकरियां देने के मामलों को 5% कोटे की शर्त में बाँध दिया है, ऐसे में 5% कोटे के हिसाब से बहुत कम पद बनते है जिससे दिन प्रतिदिन करूणामूलकों आश्रितों की संख्या बढ़ रही है।
करुणामूलक संघ के उपाध्यक्ष अजय कुमार का कहना है कि कुछ विभागों में करूणामूलकों को 5% कोटा तक भी नहीं दिया जा रहा है, इस बात को विभागों की मनमानी कहे या सरकार की नाकामी, यह स्वयं सीएम जयराम ही बता सकते हैं। उनका कहना है कि यह बात सीएम जयराम के संदर्भ में भी लाई गई है। हालांकि, अबतक इस पर सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
बता दें कि सरकार के पास विभिन्न विभागों, बोर्ड व निगमों में 4500 से ज्यादा करुणामूलक नौकरी सम्बन्धी मामले पहुंचे हैं। वहीं, प्रभावित परिवार करीब 15 साल से नौकरी का इंतजार कर रहें है। उन्होंने बताया कि कई विभागों, बोर्ड व निगमों में कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने के बाद आश्रित परिवार दर-दर की ठोंकरें खाने को मजबूर है। ऐसे में सभी करूणामूलक आश्रितों ने हिमाचल सरकार के 3 साल पूरा होने पर फिर से गुहार लगाई है कि करुणामूलक नौकरी मामलों पर जल्द से जल्द उचित फैसला लें व पीड़ित परिवारों को करुणामूलक आधार पर नियुक्तियां प्रदान करे।
करुणामूलक संघ का कहना है कि करुणामूलक आधार पर नौकरी के लिए वन टाइम रिलेक्सेशन के तहत सभी पदों को एक साथ भरने की कृपा करें व करूणामूलक आधार पर दी जाने वाली नौकरियों से आय का दायरा हटाए जाने की मांग की और कहा गया कि पेंशन व अन्य भत्तों को सालाना इनकम में ना जोड़ा जाए और 5% कोटे की शर्त को पूर्ण रूप से हटा दिया जाए।




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