हिमाचली ने जीता चंडीगढ़ के मेयर पद का चुनाव, रविकांत शर्मा ने कांग्रेस को दी पटखनी

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हिमाचली ने जीता चंडीगढ़ के मेयर पद का चुनाव, रविकांत शर्मा ने कांग्रेस को दी पटखनी

चंडीगढ़। केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के किले पर एक हिमाचली ने अपना परचम लहरा दिया है। दरअसल, हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के मूल निवासी रविकांत शर्मा ने चंडीगढ़ के मेयर पद का चुनाव जीता है। बीजेपी की तरफ से उम्मीदवार बनाए गए रवि कांत शर्मा ने कांग्रेस के देवेंद्र सिंह बबला को हराकर मेयर पद हासिल किया। बीजेपी प्रत्याशी शर्मा को 17, जबकि कांग्रेस के प्रत्याशी बबला को 5 मत मिले। वहीं, दो वोट खराब हुए, जबकि अकाली पार्षद ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। 

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रविकांत शर्मा के मेयर चुनाव जीतने पर भाजपा पार्षदों में खुशी की लहर है। चुनाव देखने के लिए पार्टी प्रभारी दुष्यंत गौतम और संगठन मंत्री दिनेश कुमार भी मौजूद रहे। मूलरूप से ऊना के निवासी रविकांत शर्मा कई वर्षों से चंडीगढ़ में ही रह रहे हैं। पहली बार ही रविकांत शर्मा पार्षद बने हैं। 

उन्होंने चार साल पहले कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा की पत्नी को वार्ड नंबर-3 से हराया था, जबकि इस सीट पर 15 साल से कांग्रेस का कब्जा था। चुनाव के लिए सांसद किरण खेर स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण नहीं आ सकी। रवि कांत शर्मा भाजपा के जिला अध्यक्ष भी रह चुके हैं। वह पिछले साल नगर निगम के सीनियर डिप्टी मेयर थे। वह ऐसे पहले पार्षद हैं जो कि सीनियर डिप्टी मेयर के बाद सीधे मेयर बने हैं।

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नए मेयर रविकांत शर्मा को मिलेंगी यह सुविधाएं

  • मेयर को सेक्टर-24 में सरकारी आलीशान घर के अलावा सरकारी गाड़ी मिलती है।
  • मेयर को दो सुरक्षाकर्मी के अलावा सरकारी चालक मिलता है।
  • घर पर काम करने के लिए दो सेवादार भी मिलते हैं।
  • नगर निगम में जो भी वित्त एवं अनुबंध कमेटी और सदन में प्रस्ताव पास होने के लिए आता है, वह मेयर के माध्यम से ही आता है।
  • मेयर किसी भी प्रस्ताव को रोक भी सकता है।
  • मेयर को हर साल दो करोड़ रुपये का फंड मिलता है, जो वह पूरे शहर के विकास में खर्च कर सकता है।
  • सीनियर डिप्टी मेयर को 20 लाख और डिप्टी मेयर को 10 लाख रुपये का फंड मिलता है।
  • मेयर को हर माह 45 हजार रुपये का मानदेय मिलता है।
  • सांसद के बाद मेयर का पद ही शहर में अहम है।
  • मेयर का कार्यकाल एक साल का होता है।
  • सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर के पास कोई अधिकार नहीं होता है।
  • सुविधा के नाम पर सिर्फ उन्हें नगर निगम में कमरा मिलता है, लेकिन उनके पास कोई फाइल नहीं आती है।
  • पार्षद कई बार सीनियर डिप्टी और डिप्टी मेयर के लिए सरकारी गाड़ी की मांग कर चुके हैं, लेकिन प्रशासन यह मांग खारिज कर चुका है।

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