कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश की आबो हवा प्रवासी पक्षियों के लिए बिगड़ती जा रही है। पौंग झील में हो रही प्रवासी पक्षियों की मौत से अधिकारी परेशान हैं। मिली जानकारी के अनुसार अधिकतर पक्षियों की मौत धामेटा और नगरोटा सूरियां वन क्षेत्रों के जगमोली और गुगलाडा इलाकों से रिपोर्ट हुई हैं। आशंका व्यक्त की जा रही है कि इन पक्षियों की मौत एवियन फ्लू से हुई है।
'एवियन फ्लू' की आहट?
वन्य प्राणी विभाग के एक अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार जिन क्षेत्रों में पक्षियों की मौत हो रही है, वहां से आवश्यक 15 सैंपल्स लेकर इंडियन वेटेरिनेरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, नार्दन रीजनल डिसीज डायग्नोस्टिक लैबोरेट्री और हाई सिक्योरिटी एनीमल डिसीज लैबोरेट्री जांच के लिए भेजे गए हैं।
अधिकारी द्वारा आगे बताया गया कि वायरल, बैक्टीरियल और पैथोजन टेस्ट रिपोर्ट्स चंद दिन में मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। तब तक हम स्पष्ट तौर पर नहीं कह सकते कि पक्षियों की मौत एवियन फ्लू (बर्ड फ्लू) से हुई है या नहीं। हमें शुरुआती संदेह है कि ये फ्लू हो सकता है, क्योंकि पक्षी बड़ी संख्या में मृत पाए गए। बता दें कि मृत पक्षियों में 95 फीसदी Bar Headed Geese हैं, जो साइबेरिया और मंगोलिया से माइग्रेट होकर हिमाचल आती हैं। हर साल ठंड में करीब 1.15 से 1.20 लाख प्रवासी पक्षी पोंग डैम सेंक्चुरी में आते हैं और करीब चार महीने तक यहीं रहते हैं।
टूरिस्ट गतिविधियों पर रोक
पंक्षियों की मौत को धर्मशाला जिला प्रशासन भी काफी गंभीरता से ले रही है। पौंग डैम सेंक्चुरी के आसपास की सभी टूरिस्ट गतिविधियों पर ऐहतियातन रोक लगा दी है। ये रोक अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। प्रशासन को लैब टेस्ट रिपोर्ट का इंतजार है। इस बीच वन विभाग ने वेट लैंड में फ्लू सर्विलांस शुरू किया है। मृत पक्षियों की सैम्पलिंग भी की जा रही है। बीते साल मार्च में सभी सैंपल्स 'एवियन फ्लू' के लिए निगेटिव पाए गए थे।
क्या है ये एवियन फ्लू?
एवियन इन्फ्लूएंजा को 'एवियन फ्लू' या 'बर्ड फ्लू' नाम से जाना जाता है, जो पक्षियों से फैलने वाली बीमारी है। इसके लिए H5N1 वायरस को जिम्मेदार माना जाता है। मानव समुदाय में संक्रमित पक्षी के संपर्क में आने से यह बीमारी होती है। बता दें कि सबसे पहले मछुआरों ने पक्षियों की बड़ी संख्या में हो रही मौत को नोटिस किया था। फिलहाल, पूरे क्षेत्र में लोग 'एवियन फ्लू' के खतरे को लेकर सहमे हुए हैं।




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