नई दिल्ली/शिमला। हिमाचल प्रदेश में हुए 256 करोड़ रूपए के छात्रवृतत्ति घोटाले के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने छात्रवृत्ति को लेकर बड़ा फैसले लेते हुए एक बड़ा ही अहम बदलाव किया है। पहले जहां छात्रों मिलने वाली छात्रवृत्ति की राशि राज्यों को दी जाती थी लेकिन अब अब से छात्रवृत्ति राशि सीधा छात्रों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को मिलने वाली पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में बदलाव किया है।
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केंद्र द्वारा किए गए इस बदलाव के तहत छात्रवृत्ति के लिए शिक्षण संस्थानों को केंद्र की ओर से नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडिटेशन और नेशनल असेसमेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल से ग्रेडिंग लेना भी अनिवार्य कर दिया है। केंद्र सरकार ने सभी शिक्षण संस्थानों को 2024 तक यह दोनों ग्रेडिंग लेने का समय दिया है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने छात्रवृत्ति राशि जारी करने के लिए छात्रों की हाजिरी को भी बायोमेट्रिक से अनिवार्य किया है, जो आधार से लिंक होगी। छात्रवृत्ति लेने के लिए विद्यार्थी को अपनी 75 फीसदी उपस्थिति भी पूरी करनी होगी।
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केंद्र सरकार की ओर से किए इस बदलाव का कारण हिमाचल प्रदेश में हुआ 256 करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला है। बतौर रिपोर्ट्स, केंद्र की ओर से दी जाने वाली 60 फीसदी राशि सीधा छात्रों के बैंक खातों में जाएगी। जबकि पहले 40 फीसदी राशि राज्य सरकार की ओर से दी जाती है। इसके बाद 60 फ़ीसदी केंद्र का पैसा मिलाकर राज्य द्वारा उसे छात्रों के खाते में ट्रांसफर किया जाता था लेकिन अब राज्य सरकार को बीच से हटा दिया गया है। अब केंद्र सरकार ने छात्रवृत्ति राशि बांटने की जिम्मेदारी खुद पर ले ली है।
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