शिमला डेस्क: आज सोमवार यानी 1 फरवरी को मोदी सरकार ने देश का आम बजट पेश किया। बजट में कई महत्वपूर्ण ऐलान किए गए हैं, हालांकि, मिडिल क्लास को इस बजट से कुछ खास नहीं मिला।
बजट में सेब, खाद, चमड़ा भी महंगा हो गया है। सेब पर 35% और खाद पर 5% का कृषि सेस लगाया है। सेब पर सेस टैक्स लग जाने से बागवानों के लिए यह मुसीबात का कारण बन सकती है।
हिमाचल समेत कश्मीर और उत्तराखंड के बागवानों को भी उम्मीद थी कि इस बार का बजट किसान और मजदूर वर्ग के लिए राहत भरी हुयी रहेगी। खासकर सेब की खेती करने वालों को भी सरकार से बजट में काफी उमीदें थी लेकिन उन्हें भी निराशा हाथ लगी है।
सेस टैक्स लगने से ऐसा भी नहीं है कि राज्य सरकार को उसका हिस्सा मिलना है। सेस की पूरी रकम केंद्र सरकार अपने पास रखती है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि सेब से वसूले जाने वाले सेस टैक्स को सरकार किस योजना में खर्च करगी।
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क्या होता है सेस टैक्स:
बता दें कि सेस से मिलने वाली राशि को भारत सरकार अन्य राज्य सरकारों के साथ साझा नहीं करती है और इससे प्राप्त समस्त कर राशि अपने पास रख लेती है। 1 जुलाई 2017 से जब जीएसटी लागू किया था तब बहुत सारे सेक्स टैक्स को जीएसटी में ही शामिल कर लिया गया था। जिससे लोगों को बहुत सारे सेस टैक्स से राहत मिली थी।
सेस टैक्स से जुड़ा एक और नियम है कि इससे वसूले गए पैसे को एक संचित कोष में जमा किया जाता है और उसी अभीष्ट उद्देश्य में व्यय किया जाता है, जिस हेतु यह टैक्स लगाया गया होता है।
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