यह भी पढ़ें: हिमाचल: पहले केंद्र से मदद मांगेंगे फिर अपना चौथा बजट पेश करेंगे सीएम जयराम
सीएम ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने बजट के लिए योजना और गैर योजना श्रेणियों की पुरानी प्रणाली समाप्त करने का फैसला लिया है। 2021-22 से वार्षिक योजना के स्थान पर अब वार्षिक विकास बजट प्रणाली शुरू करने का निर्णय लिया। सीएम ने आगे बताया कि नई प्रणाली में सभी 4 उप-योजनाओं के नाम बदल दिए गए हैं। सामान्य योजना, अनुसूचित जाति उप-योजना, जनजातीय उप-योजना और पिछड़ा क्षेत्र उप-योजना के नाम अब सामान्य विकास कार्यक्रम, अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम, अनुसूचित जनजाति विकास कार्यक्रम और पिछड़ा क्षेत्र विकास कार्यक्रम रखें जाएंगे।
यह भी पढ़ें: वीडियो: कृषि कानूनों पर चर्चा के दौरान अनुराग और कांग्रेस सांसद के बीच हुई जबरदस्त बहस
सीएम ने कहा कि नाम परिवर्तित किए गए हैं लेकिन अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और पिछड़े क्षेत्रों के विकास के लिए धन के आबंटन में कोई कमी नहीं की गई है। एनुअल प्लान के तहत सामान्य विकास कार्यक्रम पर कुल राज्य विकास बजट का 64.82 प्रतिशत पैसा खर्चा जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि सामान्य विकास कार्यक्रम के लिए 6096.70 करोड़ रूपए, अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम के लिए 2369.22 करोड़, अनुसूचित जनजाति विकास कार्यक्रम के लिए 846.49 करोड़ और पिछड़े क्षेत्र विकास कार्यक्रम के लिए 93 करोड़ रूपए आबंटित किए गए हैं।
हिमाचल प्रदेश से जुडी हर अपडेट पाने के लिए यहां क्लिक कर डाउनलोड करें News 4 Himalayans का मोबाइल एप




0 टिप्पणियाँ
Please do not enter any spam link in the comment box. Thanks