दरअसल, मामला मंडी जिले का है। अक्टूबर-2020 में पहली बार हुई जांच में जब गर्भ होने की जानकारी सामने आई तो मां ने बेटी से पूछताछ की। बेटी ने कुछ नहीं बताया। हालांकि, माँ ने शक के आधार पर एक लड़के के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम (Pocso Act) के तहत मामला दर्ज कराया। पुलिस ने लड़के को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
पुलिस को 60 दिन के अंदर कोर्ट में चालान पेश करना था। नाबालिग लड़की ने भी कोर्ट में या फिर पुलिस के सामने लड़के के विरुद्ध कोई बयान नहीं दिया था। पुलिस जब दोबारा स्वास्थ्य संस्थान में नाबालिग की मेडिकल जांच करवाई तो भ्रूण नहीं मिला। पहली बार जांच करने वाले डॉक्टर इस बात से हैरान थे। रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस भी हैरान हो गई।
बयान पर कायम रहे डॉक्टर:
युवक को जमानत भी नहीं मिली थी। जमानत के लिए उसने हाई कोर्ट में अपील की। हाई कोर्ट ने लड़के को जमानत दे दी है। लेकिन नाबालिग के पेट से भ्रूण कहां, कैसे गायब हो गया? पुलिस इस बात का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई। जांच करने वाले डॉक्टर भी अपने बयान पर कायम रहे। ऐसे में हाईकोर्ट ने सीआईडी को छानबीन का जिम्मा सौंपा है और जल्द रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।




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