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बता दें कि प्रदेश में अब तक 70 हजार में से 51,573 हेल्थ केयर वर्करों ने ही कोरोना वैक्सीन की डोज ली है। हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार से दो चरणों में 1,80,500 वैक्सीन डोज मिली हैं। बतौर रिपोर्ट्स, आइजीएमसी शिमला सहित प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों में चिकित्सक कोरोना वैक्सीन लगाने में रूचि नहीं दिखा रहे हैं। मंडी जिले में स्थित नेरचौक स्थित मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के हेल्थ केयर वर्करों को छोड़ दें तो राज्य में हेल्थ केयर वर्कर वैक्सीन लगाने से पीछे हटते नजर आ रहे हैं। अब ऐसे में सरकार ने यह फैसला लिया है कि नौ फरवरी तक जितनी संख्या में वैक्सीनेशन हो जाएगा, उसके बाद शेष डोज फ्रंट लाइन कर्मियों में शामिल पुलिस, होमगार्ड सहित सफाई कर्मियों को दी जाएगी। तय अवधि के बाद हेल्थ केयर वर्करों को वैक्सीन नहीं लगेगी।
सेना ने जयराम सरकार से मांगी 35 हजार वैक्सीन
इस सब के बीच प्रदेश में सेना ने सैनिकों के लिए 35 हजार कोरोना डोज की मांग की है। बता दें कि अब तक स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सेना को 1830 व 1490 डोज वैक्सीन दी जा चुकी है। देश की प्रदेश सरकारों को भारत सरकार का निर्देश है कि सेना की जरूरत को पूरा करने के लिए राज्य की ओर से मांग के अनुसार डोज उपलब्ध करवाई जाए। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े एक अधिकारी का कहना है स्वास्थ्य कर्मियों को नौ फरवरी तक ही वैक्सीन दी जाएगी। उसके बाद स्वास्थ्य विभाग के किसी भी वर्ग को वैक्सीन नहीं दी जाएगी। पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों के लिए आई वैक्सीन बचती है तो ये दूसरे चरण में फ्रंट लाइन कर्मियों को दी जाएगी।
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