कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले स्थित इंदौरा के आरएलए कम एसडीएम कार्यालय से फर्जीवाड़े से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने है। बतौर रिपोर्ट्स, नूरपुर और इंदौरा में दलाल मोटी रकम लेकर आरसी और लाइसेंस बनाने का काम करवाते हैं। अब बताया जा रहा है कि जाली कागजात पेश करके गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन करवा दी गई है। मिली जानकारी के मुताबिक़ टैक्स बचाने के चलते भारत में स्टेज-4 गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन अप्रैल 2020 को बंद कर दिया गया था लेकिन अब पता चला है कि जाली कागजात पर इन गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन करवा दिया गया है। इनमें ज्यादातर गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन अप्रैल 2020 से लेकर सितम्बर 2020 के बीच किया गया है।
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इस मामले की जांच में इस बात का पता पाया गया है कि ज्यादातर लोगों ने जाली आधार कार्ड पेश किए हैं। क्योंकि बाकी राज्यों की अपेक्षा हिमाचल में रजिस्ट्रेशन फीस काफी कम है। ऐसे में कागजात में गाड़ियों की कीमत कम दिखाई गई है, ताकि रोड टैक्स कम लगे। वहीं, कुछ लोगों ने दर्शाया है कि वह सैनिक हैं। इससे गाड़ियों पर लगने वाला रोड़ टैक्स कहीं ज्यादा कम हो जाता है। गौरतलब है कि इंदौरा आरएलए कम एसडीएम कार्यालय पहले भी जाली लाइसेंस बनाने को लेकर सुर्खियों में रहा है। बतौर रिपोर्ट्स, दफ्तर के कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना यह नहीं हो सकता है।
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इस बारे में सवाल किए जाने पर एसडीएम इन्दौरा सोमिल गौतम ने बताया कि हमें उच्चाधिकारियों की नई तकनीक के सॉफ्टवेयर से जानकारी मिली थी कि कुछ गाड़ियों ऐसी हैं, जिनकी जाली कागजात पेश करके रजिस्ट्रेशन हुई है। उन्हें 7 दिन की मोहलत दी गई है। सही कागजात दिए गए है तो ठीक है, वर्ना आरसी रद्द कर दी जाएगी और धारा 55 के तहत एफआईआर दर्ज होगी। एक सूची तैयार करके थाना इंदौरा में भेजी जा रही है। दफ्तर के लेखाधिकारी को बदल दिया गया है और उसकी जगह नए लेखा अधिकारी की नियुक्ति की गई है।
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