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सीएम जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित राज्य योजना बोर्ड की बैठक में रमेश ध्वाला ने कहा कि वह लंबे समय से वह हर बजट में खैर कटान का मुद्दा उठाते हैं। यह विभाग की जिम्मेदारी है कि कितने दरख्त टूट हुए हैं और उखड़े हुए हैं। इस बारे में सोचा जाना चाहिए। ध्वाला कई बार इस बात को दोहरा चुके हैं कि अकेला खैर ही हिमाचल के कर्ज को उतारने का सामर्थ्य रखता है।
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ध्वाला ने कहा कि आय बिजली के प्रोजेक्टों, सिंचाई आदि कहां से आए आएगी। इस बारे में ध्यान देने की जरूरत है। राज्य में आय के बड़े संसाधन है। पशुधन के लिए कोई योजना बनाए जाने की जरूरत है। गोबर, गोमूत्र आदि का इस्तेमाल हो। इससे रोजगार मिल सकता है। स्कूल इतने सारे खोले गए हैं। अगर क्लब किया जाए तो इससे भी खर्च में कटौती की जा सकती है।
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