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कोरोना काल में मरीजों को उनके घरों से कोविड केयर सेंटर और अस्पताल में शिफ्ट करवाना व उनके संक्रमित होने के बाद उनसे संपर्क करना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी थी। फोन से मरीज को सूचना देना व उसका मनोबल बनाए रखना भी अहम कार्य था। इसी कार्य में दिन रात जुटे हुए मूल रूप से पपरोला निवासी डा आदित्य सूद बताते हैं कि इस घड़ी में विभाग की टीम सहित कई लोगों ने अहम भूमिका निभाई।
वह बताते हैं कि उनके पास मार्च से यह जिम्मेदारी थी कि जो भी कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है उसका मनोबल सामान्य व्यक्ति की तरह बनाए रखना और उसे उसके गांव से एंबुलेंस के जरिए कोविड केयर सेंटर या अस्पताल में शिफ्ट करवाना होता था। इस दौरान उन्होंने पॉजिटिव आए लोगों से बात की। उनका यही प्रयास रहता था कि पॉजिटिव व्यक्ति को यह महसूस न होने दिया जाए कि वह समाज से कट रहा है।
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उन्होंने बताया कि कई बार कोविड केयर सेंटर से किसी व्यक्ति की हालत खराब होने पर देर रात एंबुलेंस की मदद से उसे अस्पताल में शिफ्ट करवाया जाता था। परिवार की भी दिक्कत होती थी लेकिन जिस कर्तव्य के लिए मुश्किल घड़ी में टीम उतरी थी आज दिल को सुकून मिलता है कि हमने जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभाया है और अब भी निभा रहे हैं।
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