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गौरतलब है कि कोरोना काल में हिमाचल प्रदेश की आर्थिक हालत पहले ही काफी ज्यादा पतली हो चुकी है। ऊपर से इस बार केंद्र ने प्रदेश के लिए आगामी वित्तीय वर्ष के बजट के लिए राजस्व घाटा अनुदान में भी कटौती कर दी है। बतौर रिपोर्ट्स, इस बार प्रदेश का बजट करीब 52000 करोड़ रूपए संभावित है। वित्तीय वर्ष 2020-21 का बजट 49131 करोड़ रूपए का था। कोरोना की वजह से हो सकता है कि चालू वित्तीय वर्ष की तुलना में यह बहुत ज्यादा न बढ़े।
सीएम जयराम ठाकुर गुरुवार को चार बजे नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे। इससे पहले वह पीटरहॉफ शिमला में स्वर्णिम हिमाचल रथ यात्रा पर आयोजित बैठक में भाग लेंगे। युवा विज्ञान पुरस्कार समारोह में भी वह हिस्सा लेंगे। वहीं, दिल्ली पहुँचने पर सीएम जयराम ठाकुर केंद्रीय मंत्रियों से विभिन्न योजनाओं का समयबद्ध बजट जारी करने और विभिन्न केंद्रीय वित्तपोषित योजनाओं में प्रदेश की आर्थिक मदद बढ़ाने की बात करेंगे।
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बता दें कि हिमाचल प्रदेश पर वर्तमान में करीब 60 हजार करोड़ रूपए का कर्ज है। हर साल नया कर्ज लेना पड़ रहा है। एक बड़ी रकम तो सालाना कर्ज और इसके ब्याज की अदायगी में ही खर्च हो रही है। राज्य का जीएसटी संग्रहण भी कोरोना काल में घट गया। कई अन्य स्रोतों से भी आमदनी कम हो गई। वैसे भी राज्य सरकार के पास आय के कम स्रोत हैं। 15वें वित्तायोग ने पहले ही सरकार को खर्च घटाने की नसीहत दी है।
राज्य की माली हालत पतली चल रही है। कोरोना संकट के बीच तो प्रदेश सरकार के खर्च और भी बढ़ गए हैं। राज्य सरकार को विशेष अनुमति लेकर सीमा से ज्यादा कर्ज लेना पड़ रहा है। प्रदेश की आमदनी घट गई है। कर्मचारियों, पेंशनरों के वेतन-भत्तों में ही सरकार का ज्यादातर बजट खर्च हो रहा है।
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