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इस संबंध में जानकारी देते हुए 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष पूर्ण चंद ने कहा कि इस मामले को लेकर यूनियन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। लंबी लड़ाई के बाद अब उन्हें इंसाफ मिला है। बता दें कि इससे पहले भी हाल ही में शिमला की निचली अदालत ने कर्मचारियों के पक्ष में राहत देते हुए कंपनी प्रबंधन को न्यूनतम वेतन देने का निर्णय दिया है। इसके अलावा अदालत ने कंपनी को 1 मई 2015 से बकाया एरियर देने भी कर्मचारियों को देने के फरमान दिए हैं।
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अदालत के इस फैसले से लगभग 800 कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। हर कर्मचारी को एरियर के रूप में 3 से 4 लाख रूपए तक मिलेंगे। अब तक कंपनी में कार्यरत एक फार्मासिस्ट को 8700 रुपये महीना दिया जाता था। लेकिन अदालत के फैसले के बाद अब फार्मासिस्ट का वेतन 17,235 रूपए महीना मिलेगा। इसके अलावा यूनियन ने जीवीके कंपनी पर गड़बड़झड़ाले व वितीय अनियमितताओं का आरोप लगाया है। बताया जा रहा है कि जीवीके कम्पनी में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है।
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