उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने से त्रासदी: 2013 से ज्यादा असर-150 लापता, हिमाचल के इन क्षेत्रों में खतरा!

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उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने से त्रासदी: 2013 से ज्यादा असर-150 लापता, हिमाचल के इन क्षेत्रों में खतरा!

चमोली/शिमला। हिमाचल प्रदेश के पडोसी राज्य उत्तराखंड के सिर एक बार फिर प्राकृतिक आपदा आन पड़ी है। दरअसल, यहां स्थित चमोली में ग्लेशियार का खंड तोताने से भारी तबाही मच गई है। बतौर रिपोर्ट्स, ग्लेशियर टूटने से बांध क्षतिग्रस्त हो गया और चमोली की धौलीगंगा नदी में बाढ़ आ गई। वहीं, प्रारंभिक सूचना के आधार पर बताया जा रहा है कि बाढ़ आने के बाद से ऋषि गंगा प्रोजेक्ट पर काम कर रहे 150 लोग लापता हैं। इसके अलावा अबतक मौके से 10 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। 

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मीडिया रिपोर्ट्स, में इस बात का दावा किया जा रहा है कि इस बार आई त्रासदी का असर साल 2013 में आई प्राकृतिक आपदा से भी अधिक है।  उत्तराखंड सरकार ने मदद के लिए 9557444486 नंबर जारी किया है। इसके अलावा लोग मदद के लिए आपदा परिचालन केंद्र के नंबर 1070 और 1905 पर भी मदद के लिए संपर्क कर सकते हैं। वहीं, पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह नेघटना का संज्ञान लेते हुए तुरंत कार्रवाई कारने की बात कही है। 

हिमाचल को क्या खतरा है यहां जानें 

उत्तराखंड में हुए इस हिमस्‍खलन का कारण दो-तीन दिन पूर्व हुई बर्फबारी है। फरवरी में जब भी इस तरह की भारी बर्फबारी होती है तो हिमस्ख्लन की आशंका कई गुना अधिक रहती है। हिमाचल में भी इस तरह का खतरा बन सकता है। पहाड़ी इलाकों में बने कई मेगावाट के हाइड्रो प्रोजेक्‍ट ऐसे हादसों का कारण बन सकते हैं।

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वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमाचल के मनाली, किन्नौर, लाहुल-स्‍पीति, कांगड़ा का बड़ा भंगाल, चंबा का कुगती पास व मणिमहेश क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि वहां भी हिमस्‍खलन को खतरा बना रहता है। इसके अलावा रावी के किनारे बसने वाले लोग व प्रोजेक्टों में काम करने वाले लोगों को ज्यादा खतरा है, क्योंकि भू-विज्ञानियों के अनुसार मणिमहेश दक्षिण दिशा में आता है। इस दिशा में धूप ज्यादा पड़ती है। दक्षिण दिशा में उत्तर के मुकाबले हिमस्खलन का अधिक खतरा होता है।

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