यह भी पढ़ें: नशे में भी क्वालिटी नहीं है: एक किलो हेरोइन से 10 किलो चिट्टा बनाते हैं आरोपी- पुलिस को खुद बताया
मीडिया रिपोर्ट्स, में इस बात का दावा किया जा रहा है कि इस बार आई त्रासदी का असर साल 2013 में आई प्राकृतिक आपदा से भी अधिक है। उत्तराखंड सरकार ने मदद के लिए 9557444486 नंबर जारी किया है। इसके अलावा लोग मदद के लिए आपदा परिचालन केंद्र के नंबर 1070 और 1905 पर भी मदद के लिए संपर्क कर सकते हैं। वहीं, पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह नेघटना का संज्ञान लेते हुए तुरंत कार्रवाई कारने की बात कही है।
हिमाचल को क्या खतरा है यहां जानें
उत्तराखंड में हुए इस हिमस्खलन का कारण दो-तीन दिन पूर्व हुई बर्फबारी है। फरवरी में जब भी इस तरह की भारी बर्फबारी होती है तो हिमस्ख्लन की आशंका कई गुना अधिक रहती है। हिमाचल में भी इस तरह का खतरा बन सकता है। पहाड़ी इलाकों में बने कई मेगावाट के हाइड्रो प्रोजेक्ट ऐसे हादसों का कारण बन सकते हैं।
यह भी पढ़ें: हिमाचल: प्रेमिका की फोन कॉल थी आखिरी बुलावा, 6 दिन के पुलिस रिमांड पर भेजे आरोपी
वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमाचल के मनाली, किन्नौर, लाहुल-स्पीति, कांगड़ा का बड़ा भंगाल, चंबा का कुगती पास व मणिमहेश क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति भी ऐसी है कि वहां भी हिमस्खलन को खतरा बना रहता है। इसके अलावा रावी के किनारे बसने वाले लोग व प्रोजेक्टों में काम करने वाले लोगों को ज्यादा खतरा है, क्योंकि भू-विज्ञानियों के अनुसार मणिमहेश दक्षिण दिशा में आता है। इस दिशा में धूप ज्यादा पड़ती है। दक्षिण दिशा में उत्तर के मुकाबले हिमस्खलन का अधिक खतरा होता है।
हिमाचल प्रदेश से जुडी हर अपडेट पाने के लिए यहां क्लिक कर डाउनलोड करें News 4 Himalayans का मोबाइल एप




0 टिप्पणियाँ
Please do not enter any spam link in the comment box. Thanks