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बकौल सीएम जयराम, 'राज्यपाल का अभिभाषण बहुत ही महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। अभिभाषण के बाद जब चर्चा होती है तो उसमें विपक्ष भाग लेता है। प्रदेश के हर व्यक्ति को इसकी पीड़ा है कि जिस तरह का व्यवहार राज्यपाल के साथ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। राज्यपाल ने अभिभाषण कितना पढ़ना है, इसके लिए सदन की अनुमति की जरूरत नहीं होती है। उन्होंने आगे कहा कि आशा कुमारी कह रही हैं कि उनकी राज्यपाल की ओर पीठ थी तो यह क्या उचित तरीका था। अपने-आप एक के बाद एक एक्सपोज हो रहे हैं। सीएम ने कहा कि कांग्रेस विधायक कहने लगे कि अभिभाषण झूठ का पुलिंदा है। अभी पढ़ा भी नहीं था कि विपक्ष के लोग निष्कर्ष तक पहुंच गए।
सीएम जयराम ठाकुर ने आगे कहा कि इससे बड़ा सबूत क्या हो सकता है कि सदन में राज्यपाल के अभिभाषण से पहले ही बोल दिया कि ये झूठ का पुलिंदा है। राजनीति करें, पर इसके लिए समय और स्थान का ध्यान रखें। नारे लगा रहे थे, कोई बात नहीं। विधानसभा में नारे लगते हैं। राज्यपाल जब गाड़ी की ओर बढे़ तो रास्ता रोक दिया। जो देखा ही नहीं, वैसा किया। विपक्ष के विधायक अपनी सीट से खडे़ होकर उपाध्यक्ष की सीट के पास आते हैं और फिर कहते हैं कि उन पर मामला दर्ज करें। मामला तो उन पर बनता है। विपक्ष के लोगों में निराशा है। इनके हारने का क्रम नहीं थम रहा। ये लोकसभा चुनाव हारे, उपचुनाव हारे। धर्मशाला में तो इनकी जमानत जब्त हो गई। जिला परिषद, बीडीसी और पंचायत चुनाव में हम जीते। अब निराशा में ये ऐसा कर रहे हैं।
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अपने नेतृत्व को यह जताने की कोशिश कर रहे हैं कि वे हाथ से लड़ने का प्रयास कर रहे हैं, इनका लोकतांत्रिक तरीकों में विश्वास नहीं रह गया है। शायद यह कार्रवाई उसी वक्त रुक जाती अगर हमारी नकल करके ही राज्यपाल के पास जाकर माफी मांग लेते। अभी भी इन्हें गलती मान लेनी चाहिए, इनको यह सलाह है। बाकी क्या करना तो यह वही जानें। विपक्ष अगर सदन में होता तो यह चर्चा और भी सार्थक हो जाती।
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