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| प्रतीकात्मक तस्वीर |
मिली जानकारी के अनुसार अब प्रबंधन ने पत्र जारी कर कहा है कि जूनियर टीमेट और जूनियर हेल्परों के पद संभालते ही मेंटेनेंस कर्मियों की सेवा समाप्त की जाए। हालांकि राहत की खबर यह है कि बोर्ड ने संकेत दिए हैं कि रिक्त चल रहे क्षेत्रों में इन कर्मियों से सेवा ली जा सकती है।
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वहीं, बोर्ड प्रबंधन के इस फैसले का मजदूर संगठनों ने विरोध भी करना शुरू कर दिया है। मजदूर संगठन सीटू ने कर्मचारियों की बहाली के लिए 17 मार्च को विधानसभा घेराव करेने का निर्णय लिया है। सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और महासचिव प्रेम गौतम ने कहा है कि पिछले सात-आठ वर्षों की सेवा अवधि के दौरान इन कर्मियों को कई हादसे का शिकार होना पड़ा। इन कर्मियों ने जान की परवाह नहीं करते हुए अपनी सेवा दी और आज इनको नौकरी से निकाला जा रहा है जोकि सरासर अन्याय है।
साथ ही राज्य विद्युत बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष दुनी चंद ठाकुर व प्रदेश महामंत्री नेकराम ठाकुर ने भी बोर्ड के फैसले का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि बोर्ड प्रबंधन का यह तुगलकी फरमान समझ से परे है। संघ ने मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से इन आदेशों को तुरंत निरस्त करने की मांग की है।




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