हिमाचल: बर्खास्त चल रहे बैंक प्रबंधक के खिलाफ 2 करोड़ की धोखाधड़ी का केस, हुआ अरेस्ट

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हिमाचल: बर्खास्त चल रहे बैंक प्रबंधक के खिलाफ 2 करोड़ की धोखाधड़ी का केस, हुआ अरेस्ट

ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले स्थित कांगड़ा केंद्रीय कोऑपरेटिव बैंक के लोन फर्जीवाड़े मामले में स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने बैंक के ही पूर्व मैनेजर सहित एक प्राइमरी टीचर को गिरफ्तार किया है। इस बात की पुष्टि विजिलेंस के एडिशनल एसपी सागर चंद्र शर्मा द्वारा की गई है।

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एएसपी सागर चंद्र शर्मा ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बैंक की ही गवर्नमेंट कॉलेज ब्रांच में तैनात रहे पूर्व मैनेजर कमल देव भोगल ने धमांदरी प्राइमरी स्कूल में तैनात शिक्षक संदीप कुमार के साथ मिलकर साल 2017 में 10 व्यक्तियों के नाम से कैश क्रेडिट लिमिट के जाली कागजात तैयार कर प्रति व्यक्ति 20 लाख रुपए लोन की राशि के रूप निकाल कर बैंक को करीब 2 करोड़ रुपए का चूना लगा दिया है। 

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विजिलेंस को मामले के संबंध में शिकायत मिलने पर शुरूआती जांच में ही आरोप सही पाए गए। जांच के दौरान जिन 10 लोगों के नाम पर फर्जी कागजात तैयार करके लोन लिया गया था, उनमें से छह लोगों को विजिलेंस ने ढूंढ निकाला, जबकि 4 लोगों के बारे में अभी भी पता नहीं चल पा रहे हैं। वहीं, जिन छह लोगों को विजिलेंस की टीम ने ढूंढ निकाला है, उन्होंने भी लोन से संबंधित किसी कागजात पर दस्तखत नहीं करने की बात कही है। 

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बता दें कि जिन लोगों के नाम पर फर्जी लोन लिए गए हैं। उनके पते भी हरोली और हरोली उपमंडल के ही भदसाली गांव के बताए गए हैं। इन लोगों को जब बैंक से लोन के नाम पर नोटिस आने लगे तब जाकर इस पूरे मामले का खुलासा हो सका। पूर्व मैनेजर कमल देव द्वारा मंजूर किए गए इन सभी कार्यों पर प्राइमरी शिक्षक संदीप कुमार द्वारा गारंटर के रूप में दस्तखत किए गए हैं। और यह सभी लोग महज 12 दिन की अवधि में ही जारी किए गए हैं।

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एसपी विजिलेंस सागर चंद्र शर्मा ने पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों आरोपियों को बुधवार शाम गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके अलावा  गारंटर ने इस जमीन को 2019 में बेच दिया था, क्योंकि बैंक प्रबंधक द्वारा गारंटर द्वारा गिरवी रखी गई जमीन के खिलाफ कोई शुल्क नहीं लगाया गया था। पूछताछ में पता चला है कि ब्याज सहित दो करोड़ 93 लाख रुपए का नुकसान बैंक को हुआ है। दोनों आरोपियों को देर शाम गिरफ्तार भी कर लिया गया।

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