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घायल युवक के परिजनों का कहना है कि घायलों का स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों और कर्मचारियों ने पूरी तरह से बिना इलाज किए ही उन्हें घर जाने के निर्देश से डाले। परिजनों का आरोप है कि शाम 6:00 बजे से लेकर रात 9:00 बजे तक युवकों के बदन में लगे गोलियों के छर्रे तक नहीं निकाले गए। उनके लाडले दर्द से कराह रहे थे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें रात को घर जाने और सुबह वापिस लाने के निर्देश दे दिए।
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इस मामले के कारण देर रात तक अस्पताल में गहमागहमी भरा माहौल बना रहा। परिजनों का आरोप है कि अगर युवकों के बदन में लगे गोलियों के छर्रों से उन्हें किसी तरह का नुकसान पहुंचता है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा? उन्होंने आगे कहा कि स्वास्थ्य विभाग को युवकों का पूरी तरह से उपचार करना चाहिए था लेकिन केवल मात्र मरहम पट्टी करके उन्हें घर भेजने के निर्देश देना स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।
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एक तरफ जहां घायल युवकों के परिजन युवकों के शरीर में लगे गोलियों के छर्रे निकालने की मांग कर रहे थे। वहीं, दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सक और चिकित्सा कर्मी युवकों को पूरी तरह सही बता कर उन्हें छुट्टी देकर घर भेज रहे थे। गौरतलब है कि पालकवाह गांव में सोमवार देर शाम ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर सोमभद्रा नदी से रेत भरकर वापिस जा रहे हलेड़ा बिलणा निवासी लखविंदर सिंह और गुरप्रीत सिंह पर 81 साल के बुजुर्ग ने गोली दाग दी थी, हालांकि गोली युवकों को नहीं लगी लेकिन गोली के छर्रे दोनों युवकों को जा लगी जिसके चलते हुए घायल हो गए और लहूलुहान हो गए थे।
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