यह कार्यविधि पिछले साल से शुरु की गई है पर ऐसा लगता है कि हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड के अधिकारी परीक्षा केन्द्रों के नामकरण को महज औपचारिकता ही समझते हैं। दरअसल, सामने आई जानकारी के अनुसार हिमाचल बोर्ड ने बॅायज स्कूल एवं को-एजूकेशन वाले स्कूलों को “सावित्री बाई फुले” परीक्षा केन्द्रों में तबदील कर दिया है।
यह भी पढ़ें: हिमाचल: कोरोना के चलते स्वर्ग सिधार गई लेक्चरर, पति भी है पीड़ित; दो दिन बंद रहेगा बाजार
बता दें कि वर्तमान में पूरे प्रदेश भर में 80 के करीब गर्ल्स स्कूल हैं इसके बावजूद अप्रैल/मई माह में संचालित की जा रही मैट्रिक तथा दस जमा दो की बोर्ड की वार्षिक परीक्षाओं के लिए जारी की गई 52 “सावित्री बाई फुले” परीक्षा केन्द्रों की सूची यह स्पष्ट प्रमाण देती है, जिसमें लड़कियों के स्कूलों की बजाय बॅायज तथा को-एजूकेशन वाले स्कूलों को ही “सावित्री बाई फुले” महिला परीक्षा केन्द्र बना दिया गया है।
बड़ा सवाल: लड़कों के पास से नक़ल सामग्री कैसे निकालेंगी महिला शिक्षक
“सावित्री बाई फुले” परीक्षा केन्द्रों में केवल महिला शिक्षिकों एवं कर्मचारियों की ही डयूटी लगाई जाएगी एवं इन केंद्रों में अधीक्षक एवं उप अधीक्षक भी महिला शिक्षकों को ही लगाया जाएगा। ऐसे में सवाल यह उठता है कि बॅायज तथा को-एजूकेशन वाले स्कूलों में नकल रोकने के लिए वे लड़कों के पास से नकल सामग्री कैसे निकालेंगी।
यह भी पढ़ें: मंडी: पंडित सुखराम के परिवारवाद को जनता ने नकारा, बेटे जयराम के साथ चली छोटी काशी
मिली जानकारी के अनुसार अभी तक केवल तीन गर्ल्स स्कूलों को ही “सावित्री बाई फुले” परीक्षा केन्द्र बनाया गया है जिनमें आर्य कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शिमला, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला निहालगढ़ (सिरमौर) तथा राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नालागढ़ (सोलन) को ही नामित किया गया हैं।
इससे भी हैरानी की बात यह है कि जिला ऊना के जिन पांच स्कूलों को “सावित्री बाई फुले” महिला केंद्र के रुप में स्थापित किया गया है और उनमें किसी भी गर्ल्स स्कूल को शामिल नहीं किया गया है।
हिमाचल प्रदेश से जुडी हर अपडेट पाने के लिए यहां क्लिक कर डाउनलोड करें News 4 Himalayans का मोबाइल एप




0 टिप्पणियाँ
Please do not enter any spam link in the comment box. Thanks