राजनीति: अनिल शर्मा की सीधी बात- मैं किसी पार्टी का बंधुआ मजदूर नहीं, अब खुलकर बोलूंगा

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राजनीति: अनिल शर्मा की सीधी बात- मैं किसी पार्टी का बंधुआ मजदूर नहीं, अब खुलकर बोलूंगा

मंडी। हिमाचल प्रदेश में मंडी जिला राजनीतिक दृष्टिकोण से अनिल शर्मा और उनके परिवार के कारण हॉटसीट बना हुआ है। इस सब के बीच बीजेपी के टिकट पर विधायक चुने गए अनिल शर्मा ने अब अपने बागी रूप को खुलकर सबके सामने ला दिया है। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही तरफ से राजनीतिक बयानबाजी का शिकार बन रहे अनिल शर्मा ने आज साफ़ कर दिया है कि वे ज्यादा लंबे वक्त तक अपनी पार्टी का साथ नहीं देने वाले। 

नगर निगम चुनाव प्रचार के दौरान अपनी ही सरकार व पार्टी के निशाने पर रहे भाजपा के विधायक अनिल शर्मा ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और जलशक्ति मंत्री महेंद्र सिंह पर निशाना साधते हुए पलटवार किया है। पत्रकार वार्ता में अनिल शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर शालीन व्यक्ति रहे हैं, मगर महेंद्र सिंह के सान्निध्य में अब वे भी झूठ बोलने लगे हैं। इन साढ़े 3 वर्षों में मंडी का विकास करवाया होता तो आज नगर निगम के चुनाव में मुख्यमंत्री और जलशक्ति मंत्री को वोट के लिए मंडी की गलियों में भटकना नहीं पड़ता। महेंद्र ने साईगलू में हामी भरी थी कि सदर का विकास वे और सांसद रामस्वरूप शर्मा देखेंगे लेकिन उसके बाद कुछ नहीं किया गया, ऐसे में मेरे काम रोककर आप पर विश्वास कौन करेगा। सदर की जनता अब ठगा हुआ महसूस कर रही है।

उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन का 50 प्रतिशत बजट केवल मात्र 2 ही विधानसभा क्षेत्रों में चला गया जबकि मंडी जिला के शेष 8 विधानसभा क्षेत्रों के साथ विकास के मामले में भी भेदभाव किया जा रहा है। मुख्यमंत्री मंडी के लिए विजन की बात करते हैं मगर वह विजन धरातल पर भी उतरना चाहिए। बतौर विधायक मैंने कई योजनाएं दी हैं मगर किसी पर भी कार्य शुरू नहीं हो पाया है। मेरे पिता पूर्व मंत्री सुखराम ने ही मंडी शहर का विकास करवाया है। जयराम ठाकुर सराज के मुख्यमंत्री बनकर रह गए हैं।

अनिल शर्मा ने कहा कि उन्हें जानबूझकर हाशिए पर धकेला गया है। मुझे और मेरे परिवार को निशाना बनाया गया। पार्टी के मंच पर उन्हें बैठने के लिए जगह नहीं दी जाती है और मंडी शिवरात्रि मेले के लिए स्थानीय विधायक होने के नाते उन्हें निमंत्रण पत्र नहीं भेजा जाता है और न ही किसी अधिकारी ने उन्हें फोन कर बुलाया है। मेरे बेटे ने गलती की है तो उसका सबक हमें मिल चुका है। इस बात को मैं स्वीकार करता हूं कि वो सबसे बड़ी भूल थी। इस बारे मैंने कई बार स्पष्टीकरण भी दिया है जबकि हार के लिए जनता को दोषी नहीं ठहराता। एक नौजवान बेटे की महत्वकांक्षा थी, पिता होने के नाते मैं उसे मौका देना चाहता था ताकि बाद में वह यह न कहे कि मैंने उसे अवसर नहीं दिया।

उन्होंने कहा कि मैं रात के अंधेरे में नहीं दिन के उजाले में आकर बात कर रहा हूं। पार्टी मेरा मुंह अब बंद नहीं करवा सकती। मैं किसी पार्टी का बंधुआ मजदूर नहीं हूं। सच्चाई की राजनीति करता हूं इसलिए किसी से डरने की आवश्यकता नहीं है। मैं न जयराम से डरता हूं न महेंद्र सिंह से कभी डरा। मुझे पता है कि हमारी डगर अब आसान नहीं है लेकिन प्रयास जारी रखेंगे। नगर निगम चुनाव में मंडी वाले डरे हुए हैं। ठेकेदारों को जलशक्ति मंत्री से डर है और कर्मचारियों को मुख्यमंत्री से तबादले का डर है। मंडी में धर्मपुर के लोगों को बसाया जा रहा है। रेहड़ी-फड़ी वालों को जानबूझकर यहां कारोबार को भेजा जा रहा है ताकि यहां इनका ही बोलवाला हो। वह दिन दूर नहीं जब आने वाले दिनों में इनका ही कब्जा होगा।

उन्होंने इस मौके पर कांग्रेस के नगर निगम घोषणा पत्र वचनबद्धता को पकड़कर कहा कि इसमें कुछ हद तक मेरा विजन दिखता है जबकि भाजपा के संकल्प पत्र को पकड़ते हुए उन्होंने कहा कि इसमें सिर्फ वायदे ही किए गए हैं। इस बारे उसने सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मैं किसी का प्रचार नहीं कर रहा। मेरे खिलाफ ही माहौल खड़ा किया जा रहा है। वक्त आने पर अब सदर की जनता ही तय करेगी कि मुझे भाजपा में रहना है या कांग्रेस में।

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