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टिकैत ने कहा कि ये समझ लेना कि 2021 का साल आंदोलन का है। पहाड़ के किसानों को भी दिल्ली आंदोलन में शामिल होने की आवश्यकता है। टिकैत ने कहा कि किसान भाईयों को यह समझ लेना चाहिए कि बैठक या फिर रैली के लिए आपको कोई भी अनुमति नहीं मिलने वाली।
हम भी रैलियों या आंदोलन के लिए कोई परमिशन नहीं लेते हैं। वहीं, पत्रकारों द्वारा राकेश टिकैत से जब पूछा गया कि वो पांवटा क्यों आए हैं और हिमाचल से क्या चाहते हैं तो उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह का आशीर्वाद लेने आया हूं।
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उन्होंने कहा कि हिमाचल के भी किसान का भी हमें सहयोग चाहिए। टिकैत ने कहा कि हिमाचल के सेब पर कंपनियों ने कब्जा कर लिया है वो बचाने आए हैं। कोरोना काल में भी हिमाचल में किसान महापंचायत करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि बंगाल में नहीं है क्या कोरोना गाइडलाइन।
टिकैत ने कहा कि प्रदर्शन का अंत 2023 में होगा। संसद जब गूंगी और बहरी हो जाती है तो सड़क से आवाज उठती है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि किसान और सरकार की अगली बातचीत का लाइव टेलीकास्ट हो।
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हिमाचल से किसानों के समर्थन को लेकर राकेश टिकैत ने कहा कि हिमाचल ठंडा प्रदेश है इसे गर्माना पड़ेगा, हिमाचल में एक आंसू गैस का गोला नहीं चला। हिमाचल के लोग भी शांत हैं और फोर्स भी शांत है।
कंगना रनौत के किसानों को आतंकवादी कहने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वो कौन है देखी नहीं कभी। इसके अलावा उन्होंने हिमाचल के किसानों को ट्रांसपोर्ट सबसिडी देने की बात भी उठाई।




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