हिमाचल में फैलने लगा ब्लैक फंगस: 3 और मामले आए सामने, सड़ जा रही है चमड़ी

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हिमाचल में फैलने लगा ब्लैक फंगस: 3 और मामले आए सामने, सड़ जा रही है चमड़ी

शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा हाल ही में ब्लैक फंगस को साल भर के लिए सूबे में महामारी घोषित किया है। वहीं, अब सूबे में कोरोना के साथ ही इस महामारी का कहर बढ़ता नजर आ रहा है। ताजा अपडेट के अनुसार हिमाचल में ब्लैक फंगस 3 और नए मामले आए हैं। 

कोरोना हब कांगड़ा में भी पहुंच गया- ब्लैक फंगस 

बतौर रिपोर्ट्स, कांगड़ा जिले में डॉ राजेन्द्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा में 2 मामले ब्लैक फंगस के कोरोना पीड़ित रोगियों से आए। इस बात की पुष्टि करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी कांगड़ा डॉ गुरदर्शन गुप्ता ने बताया कि पीड़ितों में 1 महिला और 1 पुरुष है। मिली जानकारी के अनुसार दोनों की आयु 40-45 वर्ष के बीच है। 

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उन्होंने बताया कि ये दोनों कांगड़ा जिला से संबंध रखते हैं और इनका इलाज शुरू हो चुका है। वहीं डीसी कांगड़ा राकेश कुमार प्रजापति ने बताया कि अभी तक इस बारे में पूरी जानकारी मुझे नहीं मिली है, परंतु मैंने आदेश दिए हैं कि अगर कोई केस संज्ञान में आता है तो उसे हरसंभव सहायता प्रदान करें। इससे पहले ब्लैक फंगस की चपेट में हमीरपुर के खागर क्षेत्र की रहने वाली महिला आई है। इसका भी आईजीएमसी में उपचार जारी है। 

हुआ पहला सफल ऑपरेशन, निकाली सड़ी हुई चमड़ी 

इस सब के बीच हिमाचल में ब्लैक फंगस की शनिवार को जहां पहली बार एंडोस्कोपी सर्जरी की गई। सर्जरी आईजीएमसी में ईएनटी विभाग के डॉक्टर जगदीप ठाकुर ने की है। जिला सोलन के अर्की की रहने वाली 40 वर्षीय महिला को दो दिन पहले आईजीएमसी में भर्ती करवाया गया था। 

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इस महिला के ब्लैक फंगस की एंडोस्कोपी सर्जरी होनी थी तभी डाक्टरों ने भी सर्जरी करने के लिए कमर कसी और महिला का सफल ऑप्रेशन हुआ है। महिला के नाक से सड़ी हुई चमड़ी निकाली गई। अब महिला की हालत स्थिर बताई जा रही है।

यहां जानें इस महामारी का पूरा ब्यौरा 

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की तरफ से जारी एडवाइजरी आपके बेहद काम की हो सकती है। आइए जानते हैं कि ब्लैक फंगस क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है।

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हवा में होता है ब्लैक फंगस

म्यूकरमाइकिस एक फंगल इन्फेक्शन है। यह उन लोगों को प्रभावित करता है, जिनका इम्यून सिस्टम किसी बीमारी या इसके इलाज की वजह से कमजोर हो जाता है। ये फंगस हवा में मौजूद होता है और ऐसे लोगों में पहुंचकर उनको संक्रमित करता है। 

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पहचानें लक्षण

  • आंख और नाक के आसपास दर्द या लालिमा
  • बुखार
  • सिर दर्द
  • खांसी
  • सांस लेने में परेशानी
  • उल्टी में खून
  • मेंटल कन्फ्यूजन

इनको है ज्यादा खतरा

  • जिनको अनकंट्रोल्ड डायबीटीज हो
  • स्टेरॉयड ले रहे हों
  • लंबे वक्त तक आईसीयू में रहे हों
  • किसी तरह का ट्रांसप्लांट हुआ हो
  • वोरिकोनाजोल थेरेपी ली हो (एंटीफंगल ट्रीटमेंट)

कैसे कर सकते हैं बचाव

  • धूल-मिट्टी भरी कंस्ट्रक्शन साइट पर जाएं तो मास्क जरूर पहनें।
  • बागवानी या मिट्टी से जुड़ा काम करते वक्त जूते, फुल पैंट्स-शर्ट और दस्ताने पहनें।
  • पर्सनल हाईजीन का ध्यान रखें। रोजाना अच्छी तरह नहाएं। 

इन बातों को ना करें इग्नोर

  • (कोरोना, डायबीटीज और इम्यूनो सप्रेसेंट ट्रीटमेंट पर हैं तो)
  • नाक जाम है या नाक से काला या खूनी पदार्थ निकले।
  • गाल की हड्डी में दर्द हो।
  • नाक/तालू के ऊपर कालापन आ जाए।
  • दांत में दर्द हो, दांतों में ढीलापन लगे, जबड़े में दिक्कत हो।
  • त्वचा में घाव, बुखार, दर्द या धुंधलापन दिखे, खून का थक्का जमे।
  • छाती में दर्द हो, सांस लेने में दिक्कत हो।

इन बातों का रखें ध्यान

  • खून में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित रखें।
  • कोविड ठीक होने के बाद डायबीटीज रोगी ब्लड ग्लूकोज पर नजर रखें।
  • स्टेरॉयड डॉक्टर की सलाह पर ही लें। इनका सही समय, सही खुराक और सही समय तक ही इस्तेमाल करें।
  • ऑक्सीजन थेरेपी के लिए साफ और स्टेराइल पानी का ही इस्तेमाल करें।
  • एंटीबायोटिक और एंटीबायोटिक दवाओं का सोच-समझकर इस्तेमाल करें। 

ना करें ये गलतियां

  • ब्लैक फंगस के लक्षणों को अनदेखा ना करें।
  • अगर नाक बंद है तो इसे साइनेसाइटिस ना समझें  खासतौर पर आप अगर हाई रिस्क कैटिगरी में हों।
  • डॉक्टर की सलाह पर KOH staining & microscopy, culture, MALDI-TOF जांचें करवाएं।
  • इलाज में देर ना करें, पहला लक्षण दिखते ही अलर्ट हो जाएं। 

कैसे संभालें स्थिति (चिकित्सक की निगरानी में)

  • डायबीटीज और डायबीटीज केटोएसिडोसिस को कंट्रोल करें।
  • अगर मरीज स्टेरॉयड ले रहा है तो इन्हें बंद करने के लिए धीरे-धीरे कम कर दें।
  • इम्यूनोमॉड्यूलेटिंग दवाएं बंद कर दें।
  • पहले से ही एंटीफंगल दवाएं ना लें।
  • रेडियो-इमेजिंग से मॉनिटरिंग करें।

नोट: यह जानकारी स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार की तरफ से जारी की गई है।

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