शिमला/हमीरपुर: हिमाचल सरकार एकतरफ दावा कर रही है कि प्रदेश में कोरोना महामारी से निपटने के लिए किसी भी चीज की कमी नहीं है. वहीं, दूसरी तरफ IGMC शिमला और हमीरपुर मेडिकल क़ॉलेज में ब्लड की किल्लत की खबर सामने आ रही है.
रिश्तेदार कर रहे रक्तदान:
मिली जानकारी के अनुसार जिला हमीरपुर के मेडिकल कॉलेज ब्लड बैंक में रक्त की भारी कमी है. कालेज में मात्र 4 यूनिट रक्त ही शेष बचा है. वहीं हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी में भी ब्लड की शॉर्टेज हो गई है.
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कोविड के अलावा अन्य बीमारी वाले मरीज भी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं. जिन्हें तत्काल ब्लड चढाने की आवश्यकता रहती है, मगर ब्लड बैंक में ब्लड की कमी के कारण तीमारदारों को ही ब्लड डोनेट करने के लिए लोगों को खोज कर लाना पड़ रहा है, जिसके बाद ही मरीजों को ब्लड चढ़ाया जाता है.
IGMC प्रशासन का दावा-इस बार नहीं ब्लड की कमी:
आईजीएमसी में ज्यादातर वार्ड कोरोना मरीजों के लिए ही कोविड वार्ड बनाए गए हैं, लेकिन ऑर्थो और इमरजेंसी वार्ड के साथ कुछेक वार्ड ऐसे हैं, जहां दूसरे मरीजों को भर्ती किया जा रहा है. मरीजों के साथ आये तीमारदारों का कहना है कि ब्लड बैंक में जिस ग्रुप की उनके मरीजों को आवश्यकता रहती है, वह नहीं मिल पा रहा है. इसके चलते उन्हें अपने रिश्तेदारों को संपर्क करना पड़ता है और सम्बंधित ब्लड डोनेट करना पड़ता है.
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आईजीएमसी प्रशासन का दावा है कि कोरोना काल के बीते वर्ष की तुलना में इस बार ब्लड की कमी नहीं है, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि अस्पताल में सम्बंधित ब्लड ग्रुप मरीज को नहीं मिल पाता है, जिसके चलते उन्हें अपने रिश्तेदारों को संपर्क करना पड़ता है. कई बार ऐसा होता है कि थैलेसीमिया मरीज को नया ब्लड चढ़ाना पड़ता है. ऐसे में यह भी बड़ा संकट रहता है जिसके चलते सम्बंधित मरीज को अपने परिवार को संपर्क करना पड़ता है.
क्या बोले अधिकारी:
डिप्टी एमएस डॉ राहुल गुप्ता का कहना है आईजीएमसी जैसे बड़े संस्थान में कई बार डॉक्टर स्वंय भी मरीजों को आवश्यकता पड़ने पर ब्लड डोनेट करते हैं. उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद भी 19 बार ब्लड डोनेट किया है और भी कई डॉक्टर हैं, जो नियमित ब्लड डोनेट करते रहते हैं क्योंकि ब्लड की प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाती है. उन्होंने स्वंय सेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों से ब्लड की कमी को दूर करने के लिए ब्लड डोनेशन कैंप लगाने का आग्रह किया है. ब्लड डोनेशन कैंप न लग पाना ब्लड की कमी होने का मुख्य कारण माना जा रहा है.
हमीरपुर मेडिकल कॉलेज का हाल:
जिला हमीरपुर का मेडिकल कॉलेज भी इस समय ब्लड बैंक में रक्त की कमी से जूझ रहा है. हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में O पॉजीटिव रक्त की भारी कमी है. कालेज में मात्र 4 यूनिट रक्त ही शेष बचा है जबकि इस रक्त की मरीजों के लिए बहुत डिमांड है.
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हमीरपुर के मेडिकल कॉलेज के एमएस रमेश चौहान की माने तो मेडिकल कॉलेज में प्रति माह 150 से 200 यूनिट रक्त की आवश्यकता होती है. कॉलेज के ब्लड बैंक में मात्र 62 यूनिट रक्त उपलब्ध है, जबकि O पॉजीटिव रक्त की अस्पताल में भारी कमी है. उन्होंने कहा कोरोना कर्फ्यू और धारा 144 के चलते जिला में रक्तदान शिविर आयोजित नहीं हो पाए हैं.
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