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बता दें कि हिमाचल में ऐसा पहली बार हुआ है जब ब्लैक फंगस से किसी की मौत हुई हो। गौरतलब है कि सूबे में अब तक ब्लैक फंगस के 8 मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं। इनमें से दो मरीजों की मौत होने की खबर सामने आई है। इसके अलावा तीन केस कांगड़ा टांडा मेडिकल कॉलेज में रिपोर्ट हुए थे। वहीं, तीन आईजीएमसी शिमला में सामने आए थे, जिनमें से अब दो की मौत हो गई है। मरीजों की मौत की पुष्टि आईजीएमसी के एमएस डॉक्टर जनक राज द्वारा की गई है।
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मिली जानकारी के मुताबिक़, आईजीएमसी शिमला में इलाज के दौरान हमीरपुर और सोलन के कसौली क्षेत्र के मरीज की मौत हुई है। प्रशासन का दावा है कि दोनों मरीजों को डाइबिटीज कीटोसिडोसिस था और ब्लैक फ़ंगस ब्रेन तक पहुंच गया था। 39 साल का हमीरपुर का मरीज गुरुवार को ही शिमला रेफर किया गया था। वहीं, सोलन के कसौली का रहने वाला मरीज (49 साल) 22 मई को शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में भर्ती हुआ था।
क्या बोले डॉक्टर
IGMC के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ जनक राज ने मौतों की पुष्टि करते हुए बताया कि ब्लैक फंगस से दो मरीजों की मौत हुई है। इनके दिमाग तक फंगस पहुंच गया था, जिस वजह से इनकी मौत हुई है। डॉ जनक राज ने कहा कि ब्लैक फंगस के चलते पांच मरीज अस्पताल में भर्ती थे, जिनका उपचार किया जा रहा था।
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इनमें से दो मरीजों की मौत हुई है। ब्लैक फंगस से ग्रस्त मरीजों के लिए अलग से 10 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है, ताकि फंगस का संक्रमण दूसरे मरीजों को अपनी चपेट में न ले सके। उन्होंने कहा कि ब्लैक फंगस के लिए मेडिसिन और आई विभाग के विशेषज्ञों के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम का गठन किया है, जो लगातार निगरानी रखे हुए है। इसके अलावा सभी मरीज़ों की टेस्टिंग करने के बाद ऑपरेशन किया जा रहा है। इनमें सबसे पहले आई मरीज के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।




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