इस सब के बीच प्रदेश में रहकर अपने लिए दो जून की रोटी जुटाने के चक्कर में मशक्कत करने वाले प्रवासी मजदूरों ने पलायन के रास्ते को चुन लिया है और अपना बोरिया बिस्तर लेकर अपने घरों की ओर कूच करने लग पड़े हैं।
यह भी पढ़ें: हिमाचल: मकान मालिक ने घर में घुसने नहीं दिया, पॉजिटिव महिला के साथ टैक्सी में रहा परिवार
वहीं, बसों के पहिए थम जाने की खबर मिलते ही प्रदेशभर में काम कर रहे दूसरे राज्यों से आए मजदूर और कर्मी बस अड्डों पर जुट गए। ज्यादातर जगह निर्माण और अन्य कार्य बंद होने से मजदूर रोजगार के प्रति आशंकित हो गए हैं। रविवार को आईएसबीटी शिमला समेत विभिन्न जिलों के इंटर स्टेट बस अड्डों पर चंडीगढ़ और दिल्ली जाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
यह भी पढ़ें: 38 दिन बनाम एक साल: कांगड़ा में हर तीसरा व्यक्ति कोरोना संक्रमित, रिकवरी रेट में भी गिरावट
आईएसबीटी टूटीकंडी के डिपार्चर फ्लोर पर टिकट काउंटर के बाहर सुबह से ही कतारें लग गईं, जिससे सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का भी उल्लंघन हुआ। बसों के लिए लोगों को आईएसबीटी में भी घंटों इंतजार करना पड़ा।
भारी संख्या में प्रवासी मजदूर रविवार को शिमला से अपने घरों को निकल लिए। नादौन में भी प्रवासी मजदूरों का पलायन शुरू हो गया और कई झुग्गियां खाली हो गईं।
यह भी पढ़ें: हिमाचल में बड़ी मिस्ट्री: गायब हुए टीचर के कपड़े पहने मिला शव, घर वाले बोले- ये वो नहीं है
रविवार को ही सरकारी बसों का संचालन कम होने की वजह से लोग निजी वाहनों और टैक्सियों के सहारे भी घर लौटने को बेताब दिखे। दरअसल, पिछले साल कोविड के चलते लगाए गए लॉकडाउन के बाद बड़े पैमाने पर बाहरी राज्यों के लोग वापस चले गए थे।
उस दौरान महाराष्ट्र से लेकर गुजरात और हिमाचल प्रदेश तक से मजदूरों ओड़िसा, बिहार, झारखंड और यूपी जैसे राज्यों की ओर निकल पड़े थे। उसी आशंका के चलते इस बार मजदूर पहले ही चरण में अपने घरों की ओर कूच करने लगे हैं।
हिमाचल प्रदेश से जुड़ी हर अपडेट पाने के लिए यहां क्लिक कर डाउनलोड करें News 4 Himalayans का मोबाइल एप




0 टिप्पणियाँ
Please do not enter any spam link in the comment box. Thanks