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पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को मेहनतकश माना जाता है और मेहनतकश लोग उच्च रक्तचाप की जकड़ में कम आते हैं। लेकिन प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी उच्च रक्तचाप की जकड़ में है। पहाड़ी प्रदेश हिमाचल की 35 फ़ीसदी आबादी उच्च रक्तचाप की चपेट में है। खानपान में बदलाव और शारीरिक क्रिया में कमी का परिणाम उच्च रक्तचाप के तौर पर देखने को मिल रहा है।
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उच्च रक्तचाप हृदय रोग के अलावा हृदयाघात, लकवा और ब्रेन स्ट्रोक का कारण बनता है। प्रदेश में बहुत से लोग तो ऐसे हैं जिन्हें पता ही नहीं होता कि उन्हें उच्च रक्तचाप है जब अस्पताल में जांच के लिए आ रहे हैं तो उनमें उच्च रक्तचाप पाया जा रहा है। अनियंत्रित खान-पान और मेहनत के काम कम करने के साथ सैर व व्यायाम न करने के कारण यह रोग लगातार बढ़ रहा है।
उच्च रक्तचाप से बचाव के लिए क्या जरूरी
- हर दिन जो व्यक्ति 45 मिनट की तेज-तेज सैर या चलना
- बीस वर्ष की आयु के बाद रक्तचाप की नियमित जांच
- जंक फूड जैसे पिज्जा, बर्गर, तले हुए खाद्य पदार्थ धूमपान व शराब का सेवन न करना
- सब्जियों व फलों का अधिक इस्तेमाल
- नियमित योग व व्यायाम
- नमक का कम इस्तेमाल
- अपने वजन को नियंत्रित रखना
- पुरुष की कमर 90 सेंटीमीटर और महिलाओं की कमर 80 सेंटीमीटर से अधिक न हो
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