आम तौर पर ऐसे मौके आने पर हिमाचल प्रदेश सरकार केंद्र के सामने मुंह उठाए हाथ फैलाकर पहुंच जाया करती थी। लेकिन इस कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने शायद सरकार को सदबुद्धी दे दी है। जो वित्तीय वर्ष के अप्रैल और मई महिनों में सरकार के सामने कर्ज लेने की नौबत नहीं आई है।
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इसके पीछे का कारण कोविड संकट के बीच केंद्र की तरफ से हिमाचल को मिल रही आर्थिक मदद और कई तरह के अनावश्यक खर्चों मे की गई कटौती माना जा रहा है। इसके अलावा अप्रैल महीने तक अच्छी राजस्व प्राप्तियां और बेहतर जीएसटी संग्रहण भी है।
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गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश सरकार मौजूदा वक्त में 60000 करोड़ से अधिक कर्ज में डूबी हुई है। वहीं वक्त बीतने के साथ ही साथ यह बोझ और बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में इस माह भी 1000 करोड़ का कर्ज लेना प्रस्तावित था। लेकिन फिलहाल के लिए सरकार ने इसे आगे टाल दिया है।
हालांकि माना यह भी जा रहा है कि सूबे में लगे कोविड कर्फ्यू के चलते सरकार को इस महीने मे कम आमदनी होगी। ऐसे में प्रदेश सरकार इस कर्ज को अगले महीने ले सकती है।
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अब यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार इसी तरह से अपने अनावश्यक खर्चों में कटौती कर जून महीने में भी कर्ज को टाल पाएगी या फिर उसके सामने ऐसा नौबत ही आ जाएगी कि उसे केंद्र के आगे हाथ पसारने पड़ जाएं। बाकी जनता तो यही चाहती है कि आर्थिक प्रबंधन इसी तरह से ठीक हो जिसकी वजह से अगले माह भी कर्ज लेने की नौबत ना आए।
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