शिमला। हिमाचल प्रदेश में कोरोना ने टूरिज्म सेक्टर का दिवाला निकाल दिया है। शिमला, मनाली और कांगड़ा में टूरिज्म की कमर टूट गई है। कोविडकाल के चलते कांगड़ा का पर्यटन उद्योग पूरी तरह से बैसाखियों पर आ चुका है। कोरोना की दूसरी लहर के चलते जून में प्रदेश के 90 फीसदी पर्यटन कारोबारी बैंक डिफाल्टर हो जाएंगे।
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टूरिज्म इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स एसोसिएशन का मानना है कि बीते 3 महीनों से पर्यटन कारोबारी बैंकों के ऋण की किस्तें और ब्याज नहीं चुका पाए हैं। इसके चलते जून में बैंक पर्यटन कारोबारियों को डिफाल्टर घोषित कर देंगे। धर्मशाला होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्विनी बाम्बा ने कहा कि यहां के 1,000 से अधिक होटलों में से लगभग 50 फीसदी को बेचने की तैयारियां कर ली हैं, हालांकि उन्होंने कहा कि संपत्ति की कीमतें भी पांच साल पहले की तुलना में 25 से 30 फीसदी कम हैं।
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वहीं, टूरिज्म इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहिंद्र सेठ ने कहा कि पर्यटन उद्योग को आर्थिक मदद न मिलने से जून में 90 फीसदी से अधिक बैंकों की ओर से लिए गए ऋणों का एनपीए होना तय है। पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का सिबिल स्कोर खराब होने से भविष्य में उन्हें बैंकों से वित्तीय मदद नहीं मिलेगी। बीते 2 साल से पर्यटन उद्योग कोरोना की मार झेल रहा है।
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एक प्रमुख होटल व्यवसायी ने अपनी पहचान उजागर न करने की शर्त पर बताया कि उसका पट्टेदार एक साल से अधिक समय से भुगतान नहीं कर रहा, जिसके चलते वो 'ऋण की किस्त नहीं चुका सका और बैंक ने उसके खाते को एनपीए में बदल दिया गया। साथ ही पट्टेदार उसकी प्रॉपर्टी को खाली भी नहीं कर रहा है और मामला कोर्ट में है। मैं कर्ज के जाल में फंस गया हूं,' अब इन लोगों की मांग है कि आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी के तहत ऋण योजना लाकर पर्यटन कारोबारियों को राहत दी जाए।
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