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इसी कड़ी में सूबे के हमीरपुर जिले से एक बड़ा ही हैरान और शर्मसार कारने वाला मामला सामने आया है, जिसने व्यवस्थाओं और इंसानियत दोनों की पोल खोलकर सबके नजरों के सामने रख दी है।
यहां पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट
भोरंज सिविल अस्पताल में गांव लडवीं का एक दंपती सुबह मधुमेह और बुखार के चलते इलाज के लिए पहुंचा। इसके बाद डॉक्टर्स ने उन्हें कोरोना टेस्ट करवाने को कहा, जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
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इस पर डॉक्टरों ने उन्हें दवाइयों की किट देकर होम क्वारंटीन होने को कहा, लेकिन प्रबंधन ने उन्हें एंबुलेंस की व्यवस्था न होने का तर्क दिया। इस पर संक्रमित दंपती घर जाने के लिए करीब पांच घंटे अस्पताल के गेट पर वाहन के इंतजार में बैठा रहा।
टैक्सी ऑपरेटर्स भी नहीं हुए साथ ले जाने को राजी
ट्रैक्सी ऑपरेटरों के आगे भी दंपती ने हाथ जोड़े, लेकिन कोई तैयार नहीं हुआ। बाद में एक ट्राला चालक ने इंसानियत के नाते दोनों को ट्राले में बिठाकर शाम 5:45 बजे घर पहुंचाया।
पीड़ित महिला ने शाम सात बजे एक समाचार पत्र से फोन पर बातचीत करते हुए बताया कि उनके पति की तबीयत खराब है, वह अस्पताल में भर्ती होना चाहते हैं, लेकिन कोई मदद नहीं कर रहा।
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वहीं, मीडिया संस्थान द्वारा इस बारे में उपायुक्त हमीरपुर देबश्वेता बनिक से फोन पर बात करने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं हो पाई। व्हाट्सऐप पर मैसेज भी भेजा, लेकिन उसका भी जवाब नहीं मिला।
उधर, बीएमओ भोरंज डॉ ललित कालिया ने कहा कि कोरोना जांच में रोजाना 20 से 25 लोग संक्रमित पाए जा रहे हैं, लेकिन संक्रमितों को घर छोड़ने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं है। दंपती को कोविड अस्पताल रेफर नहीं किया था, उन्हें दवाइयां देकर होम क्वारंटीन होने को कहा था।
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