कांगड़ा/मंडी। हिमाचल प्रदेश में जारी कोरोना वायरस के कहर के बीच हालात कुछ ऐसे हो गए हैं कि अपने भी परायों जैसा व्यवहार करने लगे हैं। इसी सब के बीच सूबे के अलग-अलग जिलों से कुछ ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिन्होंने लोगों को यह सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि क्या मानवता जैसी कोई चीज जिंदा बची भी है या नहीं।
इसी कड़ी में सूबे में मंडी और कांगड़ा जिले से दो मामले सामने आए हैं, जिनके बारे में जानने के बाद आपको शर्म और गुस्सा एक साथ आएगा।
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प्रदेश के मंडी जिले में जहां एक महिला के शव को जब सबने हाथ लगाने से इनकार कर दिया तो डंडे से बांध कर एक किलोमीटर दूर सड़क तक पहुंचाया। हैरान करने वाली बात तो ये है कि महिला की मौत कोरोना से नहीं हुई थी।
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वहीं, दूसरी तरफ कांगड़ा जिले से रिपोर्ट किए गए मामले में तो एक स्कूल में कार्यरत प्रधानाचार्य का 27 वर्षीय बेटा कोरोना की भेंट चढ़ गया। कोरोना का खौफ इस कदर लोगों के जहन में बैठ गया है कि मृतक को चारपाई से नीचे उतारने के लिए कोई आगे नहीं आया। तो आइये एक एक कर जानते हैं दोनों ही मामलों के बारे में:-
कोरोना से नहीं गई महिला की जान फिर भी किसी ने हाथ नहीं लगाया
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में एक बुजुर्ग महिला को कंधा देने के लिए जब आसपड़ोस व गांव- खेड़े के लोग सामने नहीं आए तो एथलेटिक्स सेंटर के खेल प्रशिक्षक गोपाल ठाकुर सामने आए। बुजुर्ग महिला के शव को डंडे से बांध कर एक किलोमीटर दूर सड़क तक पहुंचाया।
इस बुजुर्ग महिला की मौत कोरोना से नहीं हुई थी। धर्मपुर के संधोल की बुजुर्ग महिला बेटी के घर गवाल गांव आई हुई थी। इसी बीच बेटी कोरोना संक्रमित हो गई और शनिवार को बुजुर्ग महिला की मौत हो गई।
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बुजुर्ग महिला की मौत पर गवाल का कोई भी व्यक्ति आगे नहीं आया जबकि वह महिला संक्रमित नहीं थी। प्रशासन को इस बात का पता चला तो उन्होंने गोपाल ठाकुर से संपर्क किया उन्होंने अपने सेंटर के दो खिलाड़ियों सुमित व विशाल के साथ गवाल गांव पहुंचकर शव को डंडों से सहारे बांधकर सड़क तक पहुंचाया।
वहां पर महिला के परिजन उसे अपने गांव अंतिम संस्कार के लिए ले गए। हैरानी इस बात की है कि खेल प्रशिक्षक गोपाल ठाकुर व उनके दो साथी 40 किलोमीटर दूर गवाल गांव पहुंच लेकिन उसी गांव के लोग शव को हाथ नहीं लग रहे थे, जबकि महिला संक्रमित नहीं थी।
मृतक को चारपाई से नीचे उतारने के लिए नहीं आया कोई आगे
कांगड़ा जिले में स्थित सबतहसील हारचक्कियां के अंतर्गत आती पंचायत में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। कोरोना महामारी का डर भरूपलाहड़ पंचायत में देखने को मिला, जहां पर स्कूल में कार्यरत प्रधानाचार्य का 27 वर्षीय बेटा गत रात 12 बजे के करीब कोरोना की भेंट चढ़ गया।
कोरोना का खौफ इस कदर लोगों के जहन में बैठ गया है कि मृतक को चारपाई से नीचे उतारने के लिए कोई आगे नहीं आया। पंचायत के उपप्रधान भीखम सिंह ने इसकी सूचना नायब तहसीलदार हारचक्कियां को दी।
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उन्होंने कुछ लोगों से इस युवा का संस्कार करने की बात की जिस पर हारचक्कियां पंचायत प्रधान तिलक राज, परगोड़ पंचायत प्रधान हेमराज, चंगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुरजन सिंह, वार्ड सदस्य हारचक्कियां राकेश कुमार, वार्ड सदस्य भरूपलाहड़ जोगिंदर कुमार ने खुद पीपीई किट पहनकर नायब तहसीलदार हारचक्कियां की देखरेख में प्रशासन द्वारा तय प्रोटोकॉल के तहत युवा को चारपाई से नीचे उतारकर उसका अंतिम संस्कार किया।
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