हिमाचल: निर्दयी समाज- बेटे के अकेले कंधे ने उठाया चार का बोझ; मां को पहुंचाया शमशान

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हिमाचल: निर्दयी समाज- बेटे के अकेले कंधे ने उठाया चार का बोझ; मां को पहुंचाया शमशान

कांगड़ा। क्या आप को लगता है कि कोरोना महामारी के इस दौर में मानवता और समाजिकता जैसी कोई चीज बची भी है। आपको एक आखिरी सत्य बताता हूं, ऐसी कोई भी चीज इस वक्त अस्तित्व में रह ही नहीं गई। इसी लिए तो हिमाचल प्रदेश के एक बेटे के अकेले कंधे ने चार कंधों में बांटने वाले भार अपने अकेले कंधे से उठाया। 

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इसे आप असल मायनों में भार भी नहीं कह सकते- क्योंकि वो तो उसकी मां थी, जिसने 9 माह तक अपने पेट के भीतर अपने लाल को पाल पोसकर नया जीवन दिया था। ऐसे में उस बेटे का जो कर्त्तव्य बनता था, उसने उसका निर्वहन भी किया। 

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लेकिन सवाल ये उठता है कि ये निर्दयी समाज कहां पर जा कर धंस गया, नाते रिश्ते निभाने वाले ढोंगी रिश्तेदार कहां जाकर मर गए। तरह-तरह की व्यवस्था के दावे करने वाले प्रशासन का कहां लोप हो गया, जो एक स्ट्रेचर या एम्बुलेंस का खर्च तक नहीं वहन कर सका। ये सारे प्रश्न आपको चुभ जरूर सकते हैं लेकिन आप इनकी कटुसत्यता से मुंह नहीं फेर सकते। 

यहां पढ़ें इस तस्वीर का किस्सा 

ये हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले से। जहां एक निजी क्लीनिक में काम करके लोगों को इस महामारी के दौर में भी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले वीर सिंह नामक इस शख्स को अपनी मां को कंधे पर लेकर शमशान जाना पड़ा, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया। 

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मामला रानीताल के समीपवर्ती गांव भंगवार का है जहां वीरवार सुबह एक कोरोना संक्रमित महिला जो कि भंगवार पंचायत की पूर्व में उपप्रधान भी रह चुकी है की घर पर ही मृत्यु हो गई। हद तो उस समय हो गई जब उस महिला को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए कोई शव को कंधा लगाने भी आगे नहीं आया। 

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ऐसे में जैसे तैसे उसके पुत्र वीर सिंह ने खुद को संभाला और मां के शव को कंधे पर उठाकर अंतिम संस्कार के लिए चल पड़ा। बताया जा रहा है कि आगे-आगे पुत्र मां के शव को कंधे पर उठाकर ले जा रहा था तो उसके पीछे ढेड़ वर्ष के बच्चे को कंधे से लगाए और दूसरे हाथ में अपनी सास के अंतिम संस्कार में उपयोग होने वाली सामग्री को लेकर उसकी पत्नी चली हुई थी। रानीताल में हुए इस वाकये ने सच में मानवता को शर्मसार करके रख दिया है। 

पंचायत के प्रधान जी की बातें भी सुन लो 

जब इस बारे भंगवार पंचायत के प्रधान सूरम सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मुझे बुखार था इसलिए मैं खुद पीड़ित परिवार के घर नहीं जा सका, लेकिन फिर भी मैंने प्रशासन से PPE किटों और हर संभव सहायता के बारे में बात की थी लेकिन पीड़ित वीर सिंह ने PPE किटों के लिए मना कर दिया और कहा कि मेरे रिश्तेदार PPE किट लेकर आ रहे हैं आप रहने दो। वहीं, मेरे कहने पर आशा वर्कर ने भी पीड़ित परिवार से संपर्क किया और हर संभव सहायता के लिए कहा था। 

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प्रधान ने बताया कि मैंने 2 ट्रैक्टर चालकों से भी शव को लेकर जाने की बात की, लेकिन दोनों ट्रैक्टर चालकों ने इंकार कर दिया। वहीं पीड़ित परिवार की गांव के कुछ लोगों ने मदद की है और वो लड़कियां काटने के लिए पहले ही जंगल में चले गए थे वो वहां पर शव का इंतजार कर रहे थे, लेकिन पीड़ित वीर सिंह ने शव को अकेले ले जाकर बहुत ही जल्दबाजी दिखाई उसने न तो मुझे और न ही किसी और बुद्धिजीवी को इस बारे में बताया कि शव को कोई कंधा नहीं लगा रहा नहीं तो हम कुछ करते जाए ताकि स्वास्थ्य कर्मियों को कोई परेशानी न झेलनी पड़े।

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