ममता की तरह धूमल भी हार गए थे अपनी सीट:
पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम ने हिमाचल प्रदेश के पिछले विधानसभा चुनाव की यादें ताजा कर दीं हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को हिमाचल प्रदेश की जनता ने स्पष्ट बहुमत के साथ जिताया था। लेकिन मुख्यमंत्री पद के दावेदार प्रेम कुमार धूमल अपनी खुद की सीट नहीं बचा पाए थे।
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हिमाचल प्रदेश में भाजपा के कद्दावर नेता माने जाते रहे, बीजेपी के सीएम पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल सुजानपुर सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार राजेन्द्र राणा से चुनाव हार गए थे।
कांग्रेस छोड़ ममता ने बनाई थी तृणमूल:
हालांकि, हार के बाद धूमल ने कहा कि उनकी जीत हार मायने नहीं रखती है। उनके लिए पहले पार्टी है और पार्टी की जीत मायने रखती है। जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री बनाया गया, जो पूर्व में मंत्री भी थे औऱ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे।
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हालांकि, वर्त्तमान में पश्चिम बंगाल की कहानी कुछ और है। तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी की पार्टी क्षेत्रीय पार्टी है। बंगाल से बाहर पार्टी का कोई अस्तित्व ही नहीं है। ममता ने कांग्रेस पार्टी छोड़ने के बाद तृणमूल कांग्रेस की नींव रखी थी। ममता से तृणमूल है न कि तृणमूल से ममता।
बंगाल की राजनीति में क्या आएगा कोई 'जयराम' !
बंगाल की जीत भी उनकी ही जीत है न की पार्टी की और ऐसी उम्मीद भी नहीं लगाई जा सकती है कि हिमाचल प्रदेश में प्रेम कुमार धूमल की तरह ममता बनर्जी भी खुद की सीट हारने की वजह से मुख्यमंत्री नहीं बनेंगी।
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यह कयास भी नहीं लगाया जा सकता कि बंगाल की राजनीति में किसी 'जयराम' को राज्य की सेवा करने का मौका मिलेगा। नियमों के अनुसार ममता को छह महीने के अंदर किसी सीट से चुनाव जीतना अनिवार्य होगा।
अपने ही शागिर्द ने दी पटखनी:
खबर लिखे जाने तक बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना जारी है। फाइनल आंकड़े नहीं आए हैं। लेकिन नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ रही ममता बनर्जी को उनके ही पार्टी से निकलकर भाजपा में शामिल हुए शुभेंदु अधिकारी ने करीब 1800 वोट से शिकस्त दी है।
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