हिमाचल में ये व्यवस्था है: लेट हुई एम्बुलेंस पॉजिटिव मरीज ने तोड़ा दम, PPE किट निकली छोटी

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हिमाचल में ये व्यवस्था है: लेट हुई एम्बुलेंस पॉजिटिव मरीज ने तोड़ा दम, PPE किट निकली छोटी

हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश में जारी कोरोना वायरस के कहर के बीच प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं और व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने के दावे और प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन असल जमीन पर हाल क्या है, आप इस खबर के माध्यम से बड़ी आसानी से समझ सकते हैं। सूबे के हमीरपुर जिला मुख्यालय से लगते दुल्हेड़ा गांव की महिला ने कोरोना से मौत के बाद उनके पति का शव जलाने में कोताही बरतने का मामला सामने आया है। 

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महिला ने प्रशासन पर समय पर एंबुलेंस न भेजने का भी आरोप लगाते हुए बताया कि कोरोना से उनके पति राकेश कुमार की मृत्यु नौ मई को घर पर हो गई थी। पति को सुबह सांस की समस्या होने पर उन्होंने 108 नंबर पर फोन किया। पहले तो किसी ने भी फोन नहीं उठाया, लेकिन बार-बार कॉल करने पर दूसरी ओर से अधिकारी ने कहा कि अभी एंबुलेंस नहीं है, समय लगेगा। 

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इस बीच समय पर एंबुलेंस न आने से उनके पति की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। इतना सब होने के बाद जब शव ले जाने के लिए उन्होंने एंबुलेंस को फोन किया। 

बताया गया कि आशा वर्कर ने भी स्वास्थ्य विभाग को फोन किया, लेकिन प्रशासन की ओर से कहा गया कि बॉडी को अपने हिसाब से किसी गाड़ी में डालो और हथली खड्ड में जला दो। आशा वर्कर को स्वास्थ्य विभाग से जवाब आया कि पीपीई किट ले जाओ और बॉडी को लपेटो। 

PPE निकली छोटी तो भेज दी बिना स्ट्रेचर वाली एम्बुलेंस 

वहीं, हद तो तब हो गई जब ये पाया गया कि जो किट प्रशासन ने दी, उसमें मृत व्यक्ति को पूरी तरह नहीं लपेटा जा सका। अधिकारियों से बात करने के बाद शव वाहन तो भेजा, लेकिन उसमें भी स्ट्रेचर नहीं था। जिसके बाद किसी तरह चार लोगों ने शव को वाहन तक पहुंचाया। 

इस बारे में सवाल किए जाने पर एसडीएम डॉ चिंरजी चौहान ने कहा कि मामला उनके ध्यान में नहीं आया है। बीते 9 मई को चार लोगों की कोरोना से मौत हो गई थी। शव वाहन दूसरी जगह गए थे। 

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उन्होंने आगे कहा कि हो सकता है कि इस कारण देरी से वाहन पहुंचा हो। स्वास्थ्य विभाग की टीम शव को लपेटती है या घर वालों से ही शव को लपेटने के लिए कहा जाता है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जाएगी। 

अब इस महामारी के दौर में इस मामले की जांच कितनी होगी इस बात का अंदाजा कोई भी लगा सकता है लेकिन इस तरह के मामले प्रदेश सरकार के दावों की पोल खोलते जरूर नजर आ रहे हैं। 

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