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शुरूआत में वह 50 बॉक्स के साथ मधुमक्खी पालन से जुदा और आज उसके पास 180 बॉक्स हैं। नरेश कुमार ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि मधुमक्खी पालन का कार्य करने के लिए उन्हें प्रदेश सरकार से 1.80 लाख रूपए उपदान के रूप में भी मिले और उन्हें सिर्फ 50 हजार रूपए का निवेश करना पड़ा। वहीं, पिछले छह महीने में ही उक्त युवक ने 3.5 टन शहद का उत्पादन किया है।
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शहद को बेचने के लिए भी उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ रहा है। युवक द्वारा आगे बताया गया कि डेरा बस्सी की एक कंपनी के साथ उन्होंने अनुबंध किया है, जो 120-130 रूपए प्रति किलोग्राम के भाव पर उनसे शहद की खरीद करती है। नरेश कुमार दूसरे बेरोजगार युवाओं को भी मुख्यमंत्री मधु विकास योजना का लाभ लेकर इस व्यवसाय से जुड़ने की सलाह दे रहे हैं।
जिले में 35 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन
बागवानी विभाग के उप-निदेशक डॉ केके भारद्वाज ने बताया कि जिले में प्रति वर्ष 35 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन होता है और लगभग 35 परिवार इस व्यवसाय से जुड़कर आजीविका कमा रहे हैं।
विभाग मधुमक्खी पालकों की हर प्रकार से सहायता करता है। उन्हें प्रशिक्षण प्रदान करता है और मधुमक्खी पालन में आने वाली हर समस्या का निवारण भी किया जाता है।
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