IGMC के बुरे हाल, बचा है सिर्फ 50 यूनिट ब्लड, रोजाना 40 यूनिट की है खपत

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IGMC के बुरे हाल, बचा है सिर्फ 50 यूनिट ब्लड, रोजाना 40 यूनिट की है खपत

शिमलाः हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल इंदिरा गांधी मेडिकल कॅालेज शिमला के ब्लड बैंक में खून लगभग समाप्त होने की कगार पर है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग इस पर कोई प्रयास करता नहीं दिख रहा है। बता दें कि अस्पताल में सिर्फ 50 यूनिट ब्लड ही हुआ है, जबकि रोजाना अस्पताल में 40 यूनिट ब्लड इस्तेमाल होता है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मरीजों को भारी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

फ़ैल सकते हैं रक्त संचारित खतरनाक रोग

बता दें कि अस्पताल के ब्लड बैंक में करीबन 1500 यूनिट रक्त संग्रह की क्षमता है। लेकिन इतनी क्षमता वाले ब्लड बैंक में सिर्फ 50 यूनिट ब्लड ही मौके पर उपलब्ध है। वहीं, अस्पताल में रोजाना 40 यूनिट ब्लड इस्तेमाल होता है। 

ऐसे में अस्पताल के ब्लड बैंक में खून की कमी ऐसे ही होती रही तो इससे रक्त संचारित खतरनाक रोग फैल सकते हैं। बताया जा रहा है कि अस्पताल में पैदा हुए इस हालात में सुधार के लिए उमंग फाउंडेशन हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करेगी। 

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इस मामले पर उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो अजय श्रीवास्तव व ट्रस्टी विनोद योगाचार्य ने कहा कि 1500 यूनिट रक्त संग्रह की क्षमता वाले ब्लड बैंक में सिर्फ 50 यूनिट रक्त उपलब्ध है और रोज करीब 40 यूनिट रक्त की खपत है। 

लेकिन इस मामले में स्वास्थ्य विभाग, राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल, एड्स कंट्रोल सोसायटी और ब्लड बैंक कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं। जबकि कोरोना काल में अकेले उमंग फाउंडेशन ने पिछले साल कर्फ्यू लगने के बाद से अब तक 17 ब्लड डोनेशन कैंप लगाए हैं।

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बतौर रिपोर्टस सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित राज्य ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल भंग पड़ी है। पिछले पांच साल से इस काउंसिल की कोई बैठक नहीं हुई है। वहीं, एड्स कंट्रोल सोसायटी यह दावा करती है कि वह ब्लड बैंकों की व्यवस्था का जिम्मा संभालती है, लेकिन ब्लड बैंकों में हो रही अव्यवस्था के बावजूद इन्होंने कोई कदम नहीं उठाया।

बैंक मे हो रही ब्लड की कमी पर उमंग फाउंडेशन ने स्वास्थ्य मंत्री से भेंट कर 29 जनवरी को एक विस्तृत ज्ञापन देकर ब्लड बैंकिंग व्यवस्था में सुधार की मांग कर चुके हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने कोई कदम नहीं उठाया।

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