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इस सप्ताह हिमाचल में कोविड पॉजिटिविटी दर 26।3 रही, जबकि पिछले सप्ताह (26 अप्रैल से 2 मई) ये दर 20।4 प्रतिशत के करीब थी।
इसके अलावा परेशान करने वाली खबर यह भी है कि हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा सहित कई जिलों में कोरोना मरीजों को दी जाने वाली जीवनरक्षक दवाओं डोक्सीसाइक्लिन और आइवर मैक्टिन की कमी ज्यादा हो रही है। इस वजह से घर में आइसोलेट कोरोना मरीजों को देरी से दवाएं मिल रही हैं। ये अपने आप में चिंता का विषय है।
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यही नहीं धर्मशाला जिले में तो पैरासिटामॉल 650 जैसी दवा भी आसानी से नहीं मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दवाईयों की कमी दूर करने का हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि वह राज्य के लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक व शिक्षित करने के लिए कई प्रकार के प्रयास कर रहा है।
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स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय के एक अधिकारी ने बताया कि टीके उपलब्ध करवाना निदेशालय का नहीं, एनएचएम का काम है। दूसरी ओर, विशेष सचिव स्वास्थ्य एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक निपुण जिंदल ने बताया कि मालूम किया जाएगा कि पीएचसी में टेटनस की आपूर्ति क्यों नहीं हो रही है। यह मामला निदेशालय से भी संबंधित है।
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