एक तो यहां स्थित जोगिंद्रनगर में कोरोना संक्रमित महिला के अंतिम संस्कार के लिए मानवीय संवेदनाएं नहीं दिखीं। वहीं, प्रशासनिक व्यवस्था की पोल तब खुली जब श्मशानघाट पर पहुंचने पर यहां गेट बंद मिले।
कई बार जमीन पर घिसटता रहा शव
नगर परिषद जोगिंद्रनगर के वार्ड-2 की संक्रमित महिला (55) की मौत रविवार को जोगिंद्रनगर अस्पताल में हुई थी। वह पांच दिन पहले कोरोना की चपेट में आई थीं।
अचानक तबीयत बिगड़ने पर स्वजन उन्हें जोगिंद्रनगर अस्पताल लाए थे। यहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद जब अंतिम संस्कार की बारी आई तो मृतक महिला के बेटे और एक नजदीकी रिश्तेदार ने बड़ी मुश्किल से शव चिता स्थल तक पहुंचाया।
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इस दौरान शव कई बार फर्श पर घसीटता रहा। इनकी मदद के लिए किसी ने हाथ नहीं बढ़ाए। हालांकि, बाद में प्रशासन की देखरेख में अंतिम संस्कार की रस्में पूरी की गईं। वहीं, शमशान पर ताला लगा होने के बाद परिजनों ने गुहार लगाईं तब भी श्मशानघाट का मुख्य द्वार नहीं खोला गया।
इसके बाद प्रशासन की सख्ती और हस्तक्षेप के बाद जब श्मशानघाट का द्वार खुला तो संक्रमित महिला के शव को अंतिम संस्कार के लिए चिता स्थल तक पहुंचाना भी मृतक के स्वजनों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा।
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इस पूर मामले की पुष्टि करते हुए एसडीएम अमित मेहरा ने बताया कि कोरोना की इस विकट परिस्थिति में जब तक सामाजिक सरोकारों में आगे रहने वाले लोग सामने नहीं आएंगे, तब तक ऐसी तस्वीरें देखने को मिलती रहेंगी। संक्रमितों के शवों के अंतिम संस्कार में प्रशासन यथासंभव सहयोग प्रदान कर रहा है।
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