मिली जानकारी के अनुसार केंद्र शिक्षा मंत्रालय द्वारा हिमाचल को 8 करोड़ की पहली किस्त जारी कर दी गई है। जिस पर शिक्षा विभाग ने काम करना शुरू भी कर दिया है।
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इसी कड़ी में सभी स्कूलों से शिक्षा विभाग ने डाटा मांगा है। ताकि ये पता लगाया जा सके कि स्कूल में किस स्तर के विकास की जरूरत है। वहीं इस प्रोजेक्ट के तहत प्री-प्राइमरी स्कूलों को मजबूत किया जाएगा।
विभागीय अधिकारियों ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि स्टार प्रोजेक्ट के तहत जारी हुई राशि का उपयोगिता प्रमाणपत्र देने के बाद ही अगली किस्त जमा होगी। यह प्रोजेक्ट प्रदेश में गुणात्मक शिक्षा देने में बहुत मददगार साबित होगा।
छह साल के लिए 600 करोड़ प्रस्तावित
बता दें कि विश्व बैंक द्वारा पोषित इस स्टार प्रोजेक्ट के तहत हिमाचल को अगले छह सालों तक 600 करोड़ मिलना प्रस्तावित है। यानि हर साल 100-100 करोड़ की ग्रांट हिमाचल को मिलेगी।
क्या किए जाएंगे प्रावधान-
लोगों के दिमाग में ये धारणा बनी होती है कि प्राइवेट स्कूल में सरकारी स्कूलों से ज्यादा सुविधाएं होती हैं और शायद इसी वजह से सभी लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में दाखिल कराना ज्यादा फायदेमंद समझते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए अब सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे। इसी अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में काफी बदलाव देखने को मिलेगें।
क्या होंगे बदलाव-
-सरकारी स्कूलों में कम्प्यूटर शिक्षा पर जोर देते हुए अधिक से अधिक कम्प्यूटर सिस्टम लगाए जाएंगे।
-शिक्षकों के प्रशिक्षण केंद्रो को आधुनिक किया जाएगा।
-शिक्षक ट्रेनिंग में भी बदलाव किया जाएगा।
-एमआईएस पोर्टल पर डाटा एकत्र करने के लिए नए तरीके अपनाएं जाएंगे।
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