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गौरतलब है कि पिछले साल सब्सिडी का युक्तिकरण होने से पहले ही बिजली महंगी हो गई है। अब सिक्योरिटी राशि को भी बढ़ाने का विचार जारी है। ऐसे में इस संकट के समय में बिजली दरों को भी बढ़ाकर उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने के आसार कम हैं। बीते दिनों हुई ऑनलाइन जनसुनवाई में सभी वर्गों के प्रतिनिधियों ने दरें नहीं बढ़ाने की मांग रखी है। ऐसे में संभावित है कि 16 मई के बाद लोगों को विद्युत नियामक आयोग को राहत भरी खबर ही मिलेगी।
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बता दें कि कोरोना संकट में वर्ष 2020 में नियामक आयोग ने बिजली दरें नहीं बढ़ाईं थीं। सरकार ने मध्य वर्ष में बोर्ड को दी जाने वाली सब्सिडी की राशि को कैबिनेट बैठक में फैसला लेकर घटा दिया था। सरकार के इस फैसले से बिजली दरों के स्लैब पर सब्सिडी तय की गई है। बढ़ते स्लैब में जाने से सब्सिडी कम हो रही है।
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इस नई व्यवस्था से उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में करीब पचास रूपए से 350 रूपए प्रतिमाह बढ़ोतरी हुई है। इस अलावा अब विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं के बिजली मीटरों की सिक्योरिटी राशि में बदलाव होने जा रहा है। पुराने कनेक्शन धारकों की एक साल बाद और नए की छह से नौ माह बाद इसको लेकर समीक्षा की जाएगी।
उपभोक्ताओं के एवरेज बिल के आधार पर सिक्योरिटी राशि तय की जाएगी। सिक्योरिटी राशि और एवरेज बिजली बिल के बीच 500 रुपये से कम का अंतर होने तक सिक्योरिटी राशि नहीं बढ़ाई जाएगी। इससे अधिक अंतर मिलने पर राशि को बढ़ाया जाएगा।
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