कांगडाः कोरोना काल में आम लोगों को अस्पतालों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी कड़ी में ताजा मामला कांगड़ा जिले स्थित ज्वालामुखी का है। जहां अस्पताल द्वारा की गई बड़ी लापरवाही की खबर सामने आई है।
बतौर रिपोर्ट्स, ज्वालामुखी के क्षेत्रीय अस्पताल में पहले तो एक गर्भवती महिला को पहले तो सात घंटे तक डिलीवरी के लिए इंतजार करवाया गया। इसके बाद केस को इमरजेंसी बता कर टांडा रेफर कर दिया गया। जिसके बाद महिला का रास्ते में ही प्रसव कराना पड़ गया।
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मिली जानकारी के अनुसार बदोली पंचायत के एक गांव की रहने वाली महिला को प्रसव पीड़ा के चलते ज्वालामुखी अस्पताल लाया गया। वहीं, अस्पताल में मौजूद वरिष्ठ चिकित्सक ने परिजनों को कहा कि घबराने की कोई बात नहीं है। महिला की शाम तक डिलीवरी हो जाएगी। लेकिन अस्पताल में 7 घंटे बीतने के बाद भी महिला को देखने कोई नहीं आया। जिसके बाद पहले मौजूद डॅाक्टर की शिफ्ट खत्म हो गयी।
गाड़ी में जन्मा बच्चा फिर प्राइवेट अस्पताल ने भी नहीं की मदद
इसके बाद दूसरी शिफ्ट में अस्पताल पहुंचे अन्य डॉक्टर ने इमरजेंसी केस बता कर महिला को टांडा अस्पताल जाने की सलाह दे दी। वहीं, परिजन बिना देरी किए महिला को लेकर टांडा अस्पताल चल दिए। इसी बीच जब वे ज्वालामुखी से लगभग 20 किलोमीटर दूर पहुंचे तो महिला की हालत बहुत खराब हो गई और महिला का प्रसव गाड़ी में ही हो गया।
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उनकी तकलीफें यहीं खत्म नहीं हुई, प्रसव के बाद जब महिला और उसके परिजन बच्चा कमजोर होने के कारण उसे दिखाने के लिए ज्वालामुखी के एक निजी अस्पताल पहुंचे। तो वहां सबसे पहले महिला की कोविड रिपोर्ट मांगी गई और रिपोर्ट न होने के कारण उन्होंने बच्चे और महिला को देखने से इंकार कर दिया। जिसके बाद परिजनों को निराश होकर घर लौटना पड़ा।
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महिला के परिजनों सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला गौसेवा प्रमुख देशराज भारती ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ज्वालामुखी के खंड चिकित्सा अधिकारी प्रवीण कुमार ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि ये मामला ध्यान में नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि इस तरह की घटना अगर अस्पताल में पेश आई है तो इस मामले की जानकारी जुटाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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