इस तस्वीर में एक बेटा अपनी कोरोना संक्रमित मृत मां को कंधे पर उठाकर अकेला शमशान जाता नजर आ रहा था। इस तस्वीर के सामने आने के बाद किसी ने प्रशासन, किसी ने सरकार, तो किसी ने इस युवक के परिजनों और इलाके के राजनेताओं पर अंगुली उठाई, जो इस युवक के साथ नहीं खड़े हुए।
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वहीं, अब यह युवक खुद मीडिया के सामने आया है और पूरी व्यवस्था की पोल-पट्टी खोलकर सबके सामने रख दी है। शख्स ने ग्रामीणों के इंकार के बाद मां के शव को अकेले श्मशानघाट ले जाने के मामले में अहम खुलासे हुए हैं।
बताया जा रहा है कि इससे पहले, टांडा मेडिकल कॉलेज ने भी महिला को अस्पताल में भर्ती करने से इंकार कर दिया था। महिला को इसके बाद घर ले जाया गया, जहां 24 घंटे में गुरुवार को महिला की मौत हो गई।
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कांगड़ा के रानीताल के भंगवार पंचायत का यह मामला है। बताया जा रहा है कि पूरे गांव में दो ही दलित परिवार हैं। वीर सिंह भी उन्हीं में से एक हैं।
वीर सिंह की मां का गुरुवार को कोरोना संक्रमण की वजह से घर पर ही मौत हो गई थी और जब उनकी मां को श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिये सरकार-प्रशासन और समाज की ओर से कोई आगे नहीं आया तो उसने ख़ुद को संभालते हुये अकेले ही मां को कंधे पर रखकर श्मशान घाट की ओर निकल गया।
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बताया जा रहा है कि युवक की रिश्तेदारों ने भी मदद नहीं की तो परेशान और निराशा में वह शव कंधे पर उठाकर चल दिया। वीर सिंह के घर से श्मशान घाट की दूरी महज एक किमी थी। हालाकिं, गांव के कुछ लोग पहले ही आगे लकड़ियां एकत्र करने के लिए चले गए थे।
वहीं, प्रधान को मामले की सूचना दी गई थी, लेकिन वह खुद कोरोना संक्रमित थे। उन्होंने हालांकि, ट्रैक्टर चालकों को मदद के लिए कहा था, लेकिन चालक ने इंकार कर दिया था। बाद में पूरा मामला सीएम तक भी पहुंचा था।
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