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अब अपने इस बयान को लेकर मंत्री का कहना है कि उन्होंने जो कुछ भी कहा था मजाकिया तौर पर कहा था। लेकिन अध्यापकों ने मेरी बात को अन्यथा ले लिया। बकौल मंत्री उनकी कोई दुर्भावना नहीं थी और अगर उनके इस बयान से किसी को ठेस पहुंची है तो वह अपना बयान वापस लेते हैं। मंत्री ने कहा कि जब बंजार में पौढ़िया चढ रहा था तो किसी ने कहा कि कोरोना काल में सभी ने काम किया। मेरी ऐसी भावना नहीं थी कि किसी वर्ग विशेष को लेकर कुछ कहूं। उन्होंने कहा कि शिक्षक राष्ट्र के निर्माता हैं।
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गौरतलब है कि महेंद्र सिंह ने कुल्लू में कहा था कि कोरोना काल के दौरान अगर किसी ने मजे लिए तो वह सबसे ज्यादा मास्टरों ने ही लिए। उसके बाद शिक्षक संघ उखड गए व महेंद्र सिंह से माफी की मांग करने लगे थे। मास्टरों के बढ़ते दबाव के बीच आखिर महेंद्र सिंह ने अपने शब्द वापस लेने की बात कहकर इस मसले को ठंडे बस्ते में डालने की पहली की है।




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