हिमाचल BJP के वाशिंग मशीन में धुल जाएंगे वीरभद्र के मंत्री के दाग; थाम लिया है जयराम का हाथ

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हिमाचल BJP के वाशिंग मशीन में धुल जाएंगे वीरभद्र के मंत्री के दाग; थाम लिया है जयराम का हाथ

शिमला:
कांग्रेस का हाथ छोड़ भाजपा का दामन थाम चुके पूर्व बागवानी मंत्री सिंघी राम पर लगे घोटाला के आरोप में क्लीन चीट मिलने जा रही है। सिंघी राम पर वर्ष 2005 के दिसंबर माह में वीरभद्र सरकार के दौरान की गई कैंची और आरी खरीद में घपला करने का आरोप था।

विजलेंस को नहीं मिले सबूत:

मामले की जांच विजलेंस कर रही थी। विजिलेंस ब्यूरो को इस मामले में पूर्व बागवानी मंत्री सिंघी राम को लपेटने के लिए सीधे सबूत नहीं मिले हैं। अब इस प्रकरण की पूरी फाइल ही बंद करने की तैयारी है। इस संबंध में विजिलेंस ब्यूरो ने अभियोजन अधिकारियों की राय भी मांगी है।


बता दें कि सिंघी राम रामपुर विधानसभा हलके से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ते आए हैं, मगर अब वह भाजपा का दामन थाम चुके हैं। आगामी उपचुनाव से ठीक पहले सिंघी राम को क्लीन चीट देने की तैयारी चल रही है। वहीं, विजलेंस ही वीरभद्र सरकार के अलीबाबा और चालीस चोर वाले मामले की भी जांच कर रही है। जिसको लेकर अधिकारियों की मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से बैठक भी हुई है।

धूमल और वीरभद्र दोनों ने नहीं दर्ज कराया नियमित केस:

गौरतलब है कि इस मामले की जांच वर्ष 2008 में शुरू की गई थी। इसे विजिलेंस ब्यूरो ने शिकायत संख्या 10/2008 के रूप में दर्ज किया था। जांच शुरू होने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टी सत्ता में आई लेकिन न तो धूमल सरकार और न ही वीरभद्र सरकार ने नियमित केस दर्ज कराया।

क्या था पूरा मामला:

वर्ष 2005 में बागवानी के कार्य के लिए कैंची और आरी की खरीद की जानी थी। बागवानी मंत्री सिंघी राम थे। 30 मार्च 2002 के निर्णय के अनुसार यह खरीद जर्मनी की कंपनी गार्डिना इंटरनेशनल से की जानी थी। इसके बावजूद खरीद मैसर्ज हर्बल नई दिल्ली से की गई। 

अफसरों ने तय किया था कि इस खरीद से पहले नई दिल्ली की फर्म उन्हें हलफनामा देगी कि जर्मनी की कंपनी के रेट उसके बराबर हैं, मगर दिल्ली वाली फर्म ने हलफनामा नहीं दिया। इसके बगैर ही इस फर्म से खरीद हुई।

1231.25 रुपये में खरीद ली 712.12 रुपये की कैंची: 

विजिलेंस में हुई शिकायत के अनुसार दो तरह की कैं चियों की खरीद 1231.25 और 692 रुपये में की गई। प्रति आरी की खरीद 825 रुपये के हिसाब से की गई। हालांकि, जर्मनी की कंपनी ने कैंचियों के रेट 712.12 और 360.18 रुपये के अनुसार तय किए। आरी का क्रय 475.16 रुपये हुआ। कुछ अफसरों ने लिखित रूप से यह संदेह जताया था कि ये रेट ज्यादा हैं। 


आरोप रहे हैं कि पूरे खरीद में मैसर्ज हर्बल नई दिल्ली को लगभग 25 से 26 लाख रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाया। वास्तविक से अधिक दरों पर कैंचियों की खरीद की। करीब 66 लाख रुपये की खरीद की गई। यह खरीद सरकारी उपक्रम हिम एग्रो के माध्यम से उद्यान विभाग के दिशा-निर्देशों पर की गई। 

इस खरीद में लगभग 10-11 लाख रुपये की अधिक अदायगी की गई। कंपनी को परिवहन और ऑपरेशनल चार्जेज दिए, जो इस फर्म को देय नहीं थे।

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