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अपने लाडले बेटे के स्वागत के लिए माता पुष्पा देवी, पिता रशपाल कदमों को रोक नहीं पाए। मां ने बेटे के मैहतपुर पहुंचते ही हार पहनाए। इससे पहले की यह प्रक्रिया पूरी होती। मां ने बेटे को अपनी चुनरी का आंचल ओढ़ दिया। यह पल भावुकता भरा था। मां के आंचल तले आकर न तो बेटा अपने आंसू रोक पाया और न माता पिता।
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टोक्यो पैरालंपिक में रजत पदक विजेता बेटे के घर पहुंचने की खुशी में मां ने खीर बनाई। इसे निषाद ने बड़े चाव के साथ खाया। बहन रमा देवी ने केक काटने का इंतजाम किया था। निषाद के साथ कोच नसीम अहमद, उनकी पत्नी वीना और कोच विक्रम भी मौजूद रहे। निषाद ने केक काटकर सभी के साथ मिलकर जीत का जश्न मनाया।
कोच ने कहा- पहली बार मिला तो भांप लिया यह लड़का कुछ करेगा
वहीं, इस मौके पर निषाद कुमार की प्रतिभा को तराशने वाले उनके कोच विक्रम ने बताया कि 2018 से ही निषाद को पैरालंपिक में भेजने का लक्ष्य तय कर लिया था। उन्होंने कहा कि वह निषाद को जब पहली बार मिले तो भांप लिया था कि यह लड़का कुछ न कुछ जरूर करेगा।
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कोच विक्रम ने बताया कि 2018 में निषाद के परिजन उनसे पंचकूला में मिले थे। निषाद का खेलों के प्रति रुझान देखते हुए उनकी प्रतिभा को तराशने के लिए कहा। खेलकूद के प्रति जुनून एक खिलाड़ी में होना चाहिए, वह निषाद में साफ झलकता था।




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