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निषाद के स्वागत में मैहतपुर द्वार पर जिलावासियों ने अपनी पलकें बिछा दी। वहीं, अपने लाडले बेटे के स्वागत के लिए माता पुष्पा देवी, पिता रशपाल कदमों को रोक नहीं पाए। मां ने बेटे के मैहतपुर पहुंचते ही हार पहनाए। इससे पहले की यह प्रक्रिया पूरी होती। मां ने बेटे को अपनी चुनरी का आंचल ओढ़ दिया। यह पल भावुकता भरा था। मां के आंचल तले आकर न तो बेटा अपने आंसू रोक पाया और न माता पिता।
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निषाद ने माता पिता सहित बहन रमा के साथ अपने सिल्वर मेडल को दिखा कर अपनी खुशी व्यक्त की। इस दौरान मीडिया कर्मियों से बात करते हुए निषाद ने कहा कि परेशानियों का दौर जीवन में आया और अनेक परेशानियों को झेला और हर खिलाड़ी परेशानियों के दौर को देखता है, लेकिन खुश हूं कि देश के लिए सिल्वर मेडल जीतने का सौभाग्य मिला है और अपने जिला व प्रदेश के साथ-साथ भारत का नाम ऊंचा हुआ है।
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उन्होंने कहा कि मेरी सफलता का श्रेय देशवासियों को है, मेरे परिवार को है, भारत सरकार, हिमाचल सरकार व साई जिन्होंने मेरी मदद की इन सब को श्रेय जाता है। उन्होंने कहा कि मुझे पहले तो यकीन ही नहीं हुआ। चार बार मैंने स्कोरबोर्ड पर देखा तब जाकर के यकीन हुआ की खुशी के पल आ गए हैं। उन्होंने दिव्यांगों को संदेश देते हुए कहा कि हौसला रखें आगे बढ़ें, कोई भी शारीरिक रूप से विकलांग हो सकता है ,लेकिन मानसिक रूप से नहीं होता। इसलिए मन को मजबूत बनाते हुए आगे बढ़ें।





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